ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में पहले ५ दिन के बाद भारत ने १० पदक जीत लिए हैं। उसमें कई खिलाड़ियों की कहानी ऐसी है, जिसमें उन्होंने बेहद कठिनाइयों का सामना किया है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है भारत के लिए पैरा एथलेटिक्स में इतिहास रचने वाली शर्मिला धनकड़ की। उन्होंने ४० साल की उम्र में गोला फेंक (एफ५७) प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर अपना नाम अमर कर दिया। आज इस स्वर्ग जैसी जिंदगी में नजर आ रहीं शर्मिला का जीवन १४ साल पहले किसी नर्क से कम नहीं था। उनके पहले पति ने उन पर इस कदर यातनाएं की थीं कि उन्हें बिना कपड़ों के सड़क पर बेटियों के साथ फेंक दिया था। ग्लासगो में सोमवार रात गोल्ड मेडल जीतने के बाद शर्मिला ने अपनी दर्द भरी कहानी बताई। उन्होंने बताया कि २०१२ में उनके नशेड़ी पति ने रेवाड़ी में उनको दो बेटियों के साथ निर्वस्त्र करके सड़क पर फेंक दिया था। इसके बाद पड़ोसियों ने उन्हें कंबल और रजाई से लपेटा। फिर शर्मिला के माता-पिता उन्हें अपने गांव छिथरौली ले गए। इस हादसे के १४ साल बाद अब भारत की इस बेटी ने ग्लास्गो में गोल्ड मेडल जीता।
