मुख्यपृष्ठअपराधअंडरवर्ल्ड सीक्रेट : फिल्मी हीरो नहीं बन पाया अबू सालेम

अंडरवर्ल्ड सीक्रेट : फिल्मी हीरो नहीं बन पाया अबू सालेम

जय सिंह

दाऊद इब्राहिम से पहली बार जब उसे ‘दिलावर खान’ ने मिलवाया, तब उसके बाद उसकी तूती बोलने लगी। उस दौर के एक व्यापारी को अबू सालेम संरक्षण देता था, वह व्यापारी अब इस दुनिया में नहीं है, उस वक्त में सीबीआई ने भी उसकी जांच की थी। उस व्यापारी का नाम था सी. जोशी, जिसने १९९३ बम विस्फोट के पहले एक फिल्म का मुहूर्त किया था, जिस फिल्म का टाइटल था ‘निराली’ और इस फिल्म का हीरो था अबू सालेम।
हथियार, ड्रग्स, उगाही
वहीं से सालेम को दाऊद की बहन हसीना पारकर की भी शह मिल गई। इसी दौर में उसने दाऊद के लिए फिल्म प्रोड्यूसर–डायरेक्टरों से वसूली तेज कर दी। धीरे–धीरे वह अंसारी गैंग का बॉस बन गया। ‘फोन पर मौत का सौदा’
फिल्म इंडस्ट्री से वसूली के बाबत उस समय मुंबई पुलिस के पास डेटा था, जिसके मुताबिक, लगभग ४० से ज्यादा फिल्मकार, १२–१५ बड़े सुपरस्टार, ८–१० संगीत कंपनियां अबू सालेम की धमकियों के शिकार हुए। उसने करोड़ों की फिरौती दिलाई। गुलशन कुमार हत्या (टी-सीरिज) में उसके रोल के चलते उसका दबदबा बढ़ गया था। उसकी शह पर रियल एस्टेट में भी ‘सिंडिकेट’ तैयार हुआ। मुंबई में अंधेरी, बांद्रा, मालाड, कुर्ला, सांताक्रुज, मीरा रोड, वसई इन इलाकों में उसने जमीन कब्जाया, बिल्डर को धमकी दी और फोर्स्ड पार्टनरशिप का बड़ा नेटवर्क तैयार किया। उस वक्त बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स में १०–२५ प्रतिशत हिस्सा मांगना आम बात थी। १९९३ ब्लास्ट के बाद दाऊद-सालेम में फूट भी पड़ी। स्रोतों के मुताबिक, उसके सामने तीन बड़ी वजहें थीं। रानी मर्चेंट के साथ संबंध से सालेम की लाइफस्टाइल ऊंची हो गई थी। इससे दाऊद के गैंग में उसके प्रति जलन और नफरत बढ़ने लगी।
पैसे का हेरफेर
दाऊद को लगा कि सालेम उगाही और बॉलीवुड से मिले करोड़ों का बड़ा हिस्सा छुपा रहा है। अंडरवर्ल्ड में ‘ओवर-पावर’ होने से सालेम अपनी पहचान ‘डॉन’ की तरह बना रहा था। डी-वंâपनी को यह बर्दाश्त नहीं था। धीरे–धीरे दोनों में दूरी आ गई और सालेम ने अलग नेटवर्क बना लिया। दुबई–नेपाल–पुर्तगाल का फरारी रूट के जरिए १९९३–२००२ के बीच अबू सालेम ने लगातार अपना ठिकाना बदला। दुबई से उसने बॉलीवुड को फोन कर उगाही शुरू की। दाऊद से फूट अलग होने के बाद भी लंबे समय तक वहीं रहा। पुर्तगाल २००२ में वह अपनी गर्लप्रâेंड मोनिका बेदी के साथ पकड़ा गया।
प्रत्यर्पण
२००५ में हिंदुस्थान की सरकार ने पुर्तगाल से सफल कराया। इस दौरान सालेम ने कोशिश की कि उसे ‘हिंदुस्थान में मौत की सजा न दी जाए।’ समझौते में यह शर्त मानी गई। अबू सालेम मुंबई जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। कई केस अभी ट्रायल में हैं। हिंदुस्थान-पुर्तगाल समझौते के अनुसार २०३० के आसपास उसकी सजा की समीक्षा होगी!

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