जन गण मन अधिनायक जय हो।
भारत भाग्य विधाता।।
इसी गीत को पूरा भारत
बड़े प्रेम से गाता।।
मन के भीतर बड़ा तिरंगा
ले करके लहराता।।
गंगा, जमुना, कावेरी के
जल में खूब नहाता।।
और हिमालय की यादों में
हरदम शीश झुकाता।।
चिड़ियों की चहचह के आगे
खुद को खोता जाता।।
शीतल मंद सुगंध हवा में
जीवन का सुख पाता।।
ऋतुओं का आलिंगन करके
जीवन सफल बनाता।।
खेतों की हरियाली का सुख
हरदम लेता जाता।।
जहां कहीं भी मानवता हो,
वही प्रेम बरसाता।।
भूख, गरीबी, बेकारी से
पीछा रोज छुड़ाता।।
जन गण मन अधिनायक जय हो।
भारत भाग्य विधाता।।
अन्वेषी
