मुख्यपृष्ठअपराधबेटियों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा...समाज के माथे पर गहरा दाग!

बेटियों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा…समाज के माथे पर गहरा दाग!

-अब कुशीनगर में दो बहनों की परिजनों ने की हत्या

कुशीनगर के सेवरही थाना क्षेत्र के देवनारायण टोला में दो सगी बहनों की हत्या से पूरे इलाके में सनसनी पैâल गई। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, दोनों बहनों की हत्या उनके ही पिता और दो भाइयों ने कथित रूप से लाठी-डंडों से पीट-पीटकर कर दी। हत्या की वजह दोनों बहनों के प्रेम संबंध बताए जा रहे हैं, जिससे परिवार नाराज था।
परिवार ने दी थी चेतावनी
बताया जा रहा है कि पिता ने दोनों युवकों के खिलाफ पहले भी तीन बार केस दर्ज कराया था। परिवार की ओर से लड़कियों को प्रेमियों से बातचीत न करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन मना करने के बावजूद संपर्क जारी रहने से परिवार में तनाव बढ़ गया। इसी विवाद ने अंतत: खूनी रूप ले लिया और दोनों बहनों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। घटना के बाद गांव में भारी तनाव और भय का माहौल है। पुलिस ने दोनों आरोपी भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पिता की तलाश जारी है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
ऑनर किलिंग का उदाहरण
यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि तथाकथित पारिवारिक सम्मान के नाम पर बेटियों की जिंदगी छीन लेने वाली मानसिकता का दर्दनाक उदाहरण है। प्रेम संबंध से नाराजगी हत्या का आधार नहीं हो सकती। समाज के सामने बड़ा सवाल है कि बेटियों की इच्छा, जीवन और अधिकार कब तक परिवार की झूठी प्रतिष्ठा की बलि चढ़ते रहेंगे?
बागपत में एकतरफा प्यार में हत्या
देश की आजादी के इतने वर्षों बाद भी बेटियों और महिलाओं के खिलाफ ऐसी घटनाओं का सामने आना पूरे समाज को झकझोर देने वाला है। अभी कुछ दिनों पहले इसी तरह बागपत जिले के छपरौली क्षेत्र में १५ वर्षीय किशोरी की हत्या ने रिश्तों की मर्यादा को शर्मसार कर दिया था। एकतरफा प्यार और शारीरिक संबंध बनाने का विरोध करने पर चचेरे भाई ने उसके सिर पर गैस सिलिंडर मारा और फावड़े से वार कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को कमरे में गड्ढा खोदकर चारपाई के नीचे दबा दिया गया।
अलीगढ़ में छत से लगाई छलांग
अलीगढ़ की घटना भी कम भयावह नहीं है। प्रताड़ना से तंग आकर एक महिला छत पर चढ़ गई और जान देने की कोशिश करने लगी, लेकिन नीचे खड़े पति और ससुराल वाले उसे बचाने के बजाय गालियां देते रहे। उकसावे के बाद महिला ने छलांग लगा दी। गिरने के बाद वह तड़पती रही, लेकिन उसे अस्पताल पहुंचाने के बजाय मारपीट की गई। पति का कथित बयान, ‘मरने दो इसे’, मानवता को शर्मसार करने वाला है।
संवेदनहीनता का भयानक चेहरा
ये घटनाएं केवल अपराध नहीं हैं, बल्कि समाज के भीतर पल रही क्रूरता, पितृसत्तात्मक सोच और संवेदनहीनता का भयावह चेहरा हैं। एक तरफ मनुष्य इतना निर्दयी हो सकता है कि अपनी ही बेटियों, बहनों या पत्नी की जान ले ले; दूसरी तरफ पीड़ित इतना मजबूर हो सकता है कि उसे जीवन से हार माननी पड़े। यह अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।
तब तक नहीं रुकेंगी ऐसी घटनाएं
सवाल सिर्फ कानून का नहीं, समाज की मानसिकता का भी है। जब तक बेटियों और महिलाओं को परिवार की ‘इज्जत’ नहीं, बल्कि स्वतंत्र व्यक्तित्व और अधिकारों वाला इंसान नहीं माना जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं लोकतंत्र और सभ्य समाज दोनों पर कलंक बनकर सामने आती रहेंगी।

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