जल प्रपात!

पर्वत के वक्ष स्थल से
बह रहा अविरल जल
उन्नयन से गिर भू को छूता
प्रवाहित हो रहा जल प्रपात।
झर झर बह रहा अविरल जल
दुग्ध धवल फेनिल सलिल
निर्झर तू तो है मन से निर्मल
प्रस्तर का सीना
बहुत कठिन छलनी करना
संचित जल को बाहर लाना
झरने बता तू यह कैसे कर पाया?
दिवस रात बहते रहते हो
पर भर नहीं सोते-जगते रहते हो
पी लेता भर अंजुरी तेरा शीतल,
शुद्ध, मीठा जड़ी बूटियों वाला नीर
बुझती थकान भर जाती उमंग
चल देते राही-यात्री
ले उल्लसित तन और मन।
सभी गिर श्रृंखलाओं से झरते झरने
हिमालय, शिवालिक, सतपूड़ा, दक्षिण घाट
दृश्य सुहावने लुभावने मनभावन
नैसर्गिक सौंदर्य दे रहे धरा को
और वन पुष्प पक्षी धन
विचलित अवसाद भरे मन
हो जाते अति प्रसन्न
तुम्हीं तो हरते वेदना मन की।
सभी प्रांतों में है विश्व विख्यात जल प्रपात
कश्मीर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश
आसाम, गोवा, झारखंड, कर्नाटक
देशवासियों से आशाएं
जाएं घूमें देखें मन को दें विश्राम।
-बेला विरदी

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