सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन सदन में सत्र की अवधि बढ़ाने को लेकर विवाद देखने को मिला। इस पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे ने भी टिप्पणी करते हुए सवाल किया है कि चार-पांच दिनों के सत्र के लिए आखिरकार सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च क्यों किया जा रहा है? दरअसल, सरकार की यही इच्छा है कि जनता के सवाल विपक्ष द्वारा नहीं उठाए जाएं इसीलिए सत्र को वैâसे समेटा जाए, वैâसे कम किया जाए, इसका प्रयास किया जा रहा है। इन शब्दों में दानवे ने महायुति सरकार पर जोरदार हमला भी किया।
दानवे ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं विदर्भ के हैं। विदर्भ में होने वाला सत्र नागपुर में क्यों होता है? नागपुर समझौता किस वजह से हुआ था? विदर्भ पर अन्याय न हो, इसलिए। उसमें तय हुआ था कि नागपुर में साल में एक बार सत्र हो। वह क्या चार दिन का हो? सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च और वह भी चार या पांच दिन का सत्र के लिए। पहला दिन तो श्रद्धांजलि, आदरांजलि और बिल रखने में ही चला जाता है। बचे पांच दिन। नागपुर में सिर्फ पांच दिन का सत्र होता है? दरअसल, आप चाहते हैं कि जनता के सवाल विपक्ष द्वारा न उठाए जाएं और इसीलिए सत्र को वैâसे समेटा जाए, वैâसे कम किया जाए, ऐसा प्रयास किया जाता है।
‘भास्कर जाधव मुझे माफ करें’
भास्कर जाधव द्वारा मुझे माफ कर देना चाहिए, ऐसी अपेक्षा निलेश राणे ने स्पष्ट की। भास्कर जाधव द्वारा ‘मुझे माफ करें’ के निलेश राणे के बयान पर दानवे से जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनका क्या-क्या माफ किया जाए, यह एक सवाल है। पिछले कुछ समय में क्या-क्या हुआ, वह पूरे कोकण को पता है, महाराष्ट्र को पता है।
