सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार में इन दिनों मंत्री अपनी धुन में मस्त हैं, जबकि राज्य में बाढ़ आपदा से जनता त्रस्त है। एक तरफ जहां किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। घर डूब गए हैं और जानवर बह गए हैं। तो दूसरी तरफ व्यापारी वर्ग भी इस बाढ़ से परेशान है। ऐसे में राज्य की महायुति सरकार के मंत्री जनता को न्याय नहीं दे पा रहे हैं। खास करके नासिक जिला जहां एक ही जिले में चार मंत्री हैं, लेकिन फिर भी नासिक जिले की जनता न्याय के लिए लाचार है। यहां की जनता का सीधा सवाल है कि जब चार-चार मंत्री नासिक से हैं, फिर भी हमें राहत क्यों नहीं?
कब तक करेंगे हमारी जिंदगी से खिलवाड़?
बता दें कि नासिक ज़िले में इस साल तीसरी बार आसमान ने कहर बरपाया है। जिले के ९८ राजस्व केंद्र पर बाढ़ आपदा से त्रासदी दर्ज हुई है। खरीफ की फसलें दूसरी बार भी पानी में बह गर्इं। किसानों की मेहनत, बीज, खाद और खर्च सब पानी में बह गया। स्वाभाविक है कि अब उनकी नाराजगी सीधे राज्य सरकार और स्थानीय मंत्रियों-जनप्रतिनिधियों पर फूट पड़ी है। राज्य के अन्न व खाद्य आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल के येवला विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। ज़िले में भुजबल, नरहरी झिरवाल, माणिकराव कोकाटे और दादा भुसे ऐसे चार-चार मंत्री होने के बावजूद हालात बेकाबू हैं। हैरानी की बात यह कि पिछली आपदा के पंचनामे आज तक पूरे नहीं हुए और अब फिर से बरसात ने किसानों को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है।
सरकार किसानों की दुश्मन
किसानों की कराह सुनकर विपक्ष अब आक्रामक हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने किसानों का आक्रोश मोर्चा निकालकर राज्य सरकार की पोल खोली है। एनसीपी के नेता वहां सरकार के घेराव में जुट गए हैं। उनका कहना है कि इस जिले में सरकार के चार-चार मंत्री हैं फिर भी नासिक जिला न्याय के लिए तरस रहा है। यहां लोग न्याय के लिए लाचार हैं। शिवसेना ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर किसानों की सुध नहीं ली गई तो सड़कों पर उतरकर जवाब दिया जाएगा।
अंगूर और प्याज उत्पादक किसान परेशान
नासिक का अंगूर उत्पादक किसान बाढ़ आपदा से तबाह हो गया है। दूसरी ओर प्याज उत्पादक पहले से ही केंद्र सरकार की नीतियों के शिकार हैं। अब लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान ने किसानों को सड़क पर उतरने पर मजबूर कर दिया है। मूसलाधार बारिश ने गोदावरी समेत सभी प्रमुख नदियों को उफान पर ला दिया है। यहां तक कि छगन भुजबल के सूखा प्रभावित इलाके की नदियां भी अब बाढ़ में बह रही हैं। नतीजा खेत पूरी तरह जलमग्न, फसलें नष्ट, किसान हताश और गुस्से में हैं।
