मुख्यपृष्ठस्तंभईरान युद्ध में ३७.५ अरब डॉलर स्वाहा फिर भी नहीं दिख रहा...

ईरान युद्ध में ३७.५ अरब डॉलर स्वाहा फिर भी नहीं दिख रहा रास्ता

-ट्रंप बोले-बातचीत को बेचैन है तेहरान

-१७ अमेरिकी सैनिकों की मौत, १०० से अधिक घायल,
संसद में हेगसेथ से तीखी पूछताछ, पाकिस्तान ने तेज की मध्यस्थता

अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने से अधिक समय से जारी युद्ध अब वॉशिंगटन के लिए सैन्य ही नहीं, आर्थिक और राजनीतिक दलदल भी बनता जा रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट की विनियोग समिति के सामने स्वीकार किया कि युद्ध पर अब तक करीब ३७.५ अरब डॉलर, यानी लगभग ३.१३ लाख करोड़ रुपए, खर्च हो चुके हैं। इस खुलासे के बाद संसद में जमकर हंगामा हुआ और प्रदर्शनकारियों ने कई बार उनकी गवाही बाधित की।
पेंटागन के अनुसार, हाल के हमलों में तीन और अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। इसके साथ युद्ध में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैन्यकर्मियों की संख्या १७ पहुंच गई है, जबकि १०० से ज्यादा घायल बताए गए हैं। भारी नुकसान के बावजूद रिपब्लिकन सांसद सेना और अन्य प्राथमिकताओं के लिए करीब ९५ अरब डॉलर के नए पैकेज को आगे बढ़ा रहे हैं। विपक्ष ने सवाल उठाया कि अरबों डॉलर खर्च करने और सैनिकों की जान जाने के बाद भी सरकार के पास स्पष्ट ‘एग्जिट प्लान’ क्यों नहीं है।
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि लगातार अमेरिकी बमबारी से ईरान तबाह हो रहा है और उसके अधिकारी पर्दे के पीछे युद्ध समाप्त कराने के लिए बातचीत को बेचैन हैं। हालांकि, ट्रंप ने तत्काल वार्ता से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका तभी बातचीत करेगा, जब तेहरान ‘सार्थक समझौते’ के लिए तैयार होगा। इससे साफ है कि एक ओर बातचीत के संकेत दिए जा रहे हैं, दूसरी ओर हमले जारी रखकर सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है।
तनाव के बीच ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी ने रावलपिंडी में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और तनाव घटाने के उपायों पर चर्चा की। पाकिस्तान इस संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
उधर ट्रंप ने लेबनान की सेना को मजबूत करने और हिजबुल्ला के निरस्त्रीकरण में मदद का भरोसा दिया है। इसी बीच फ्रांस ने तेहरान में अपने दो राजनयिकों को हिरासत में लेने और एक के साथ कथित मारपीट पर ईरानी राजनयिक को तलब किया है। ईरान ने आरोपों से इनकार किया है। इस तरह युद्ध की आग अब सैन्य मोर्चे से आगे बढ़कर कूटनीतिक संबंधों को भी झुलसाने लगी है।

अन्य समाचार