मुख्यपृष्ठनए समाचार६३ प्रतिशत काम पूरा, पर समय सीमा पर मंडरा रहा खतरा!

६३ प्रतिशत काम पूरा, पर समय सीमा पर मंडरा रहा खतरा!

-काम ज्यादा वर्कर्स कम का नतीजा
-वरली एसटीपी प्रोजेक्ट की सुस्त चाल
द्रुप्ति झा / मुंबई
मनपा के सुस्त रवैये और ढीली कार्यप्रणाली के कारण वरली में बन रहा ५०० एमएलडी क्षमता का महत्वाकांक्षी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट लगातार पिछड़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वाली मनपा इस परियोजना का अब तक केवल ६३ प्रतिशत काम ही पूरा कर सकी है। प्रोजेक्ट की इस लचर गति से नाराज अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर को खुद मौके पर जाकर अधिकारियों और ठेकेदारों को आड़े हाथों लेना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अधिकारियों की लापरवाही और विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण यदि निर्माण में तेजी नहीं लाई गई, तो तय समयसीमा तक काम पूरा होना नामुमकिन है। प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान प्रशासनिक नाकामियों की कई परतें उधड़कर सामने आर्इं। विशालकाय निर्माण कार्य के बावजूद साइट पर केवल १,००० श्रमिक ही तैनात हैं, जो काम की गंभीरता को देखते हुए बेहद कम हैं। इसके अलावा पुरानी इमारतों को गिराने और नए निर्माण की प्रक्रिया में भी तकनीकी योजना बनाने के बजाय फाइलों को अटकाया जा रहा है।
अक्टूबर से शुरू हो रहे अगले आठ महीने बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सामग्री की आपूर्ति से लेकर मैनपावर बढ़ाने के मामले में ठेकेदारों की ढिलाई साफ दिख रही है, जिससे इस करोड़ों की परियोजना की लागत और समय दोनों बढ़ने की पूरी आशंका है। मनपा की इस लेट लतीफी का खामियाजा सीधे तौर पर मुंबई की जनता और समुद्री पर्यावरण को भुगतना पड़ रहा है। पुराने प्लांट में केवल प्राथमिक उपचार करके गंदा सीवेज पानी समुद्र में बहाया जा रहा है, जिससे समुद्री जीवों और तटीय पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। फोर्ट, भायखला, दादर और वरली के नागरिकों को आधुनिक एमबीआर तकनीक से साफ पानी मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। यदि मनपा प्रशासन ने आने वाले दिनों में युद्ध स्तर पर काम शुरू नहीं कराया, तो स्वच्छ मुंबई का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सिर्फ कागजी वादों तक ही सीमित रह जाएगा।

 

 

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