– आवाज फाउंडेशन की जांच में बेरियम नाइट्रेट मिलने का दावा
– क्यूआर कोड में भी खामियां, बाजार में बिक रहे फर्जी ग्रीन पटाखों पर सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
त्योहारों के सीजन में पर्यावरण और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ‘ग्रीन क्रैकर्स’ को एक वैकल्पिक और सुरक्षित उपाय के रूप में पेश किया जाता है। हालांकि, हालिया रिपोर्ट्स और एनजीओ ‘आवाज फाउंडेशन’ की ओर से किए गए ़खुलासे ने ग्रीन पटाखों के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आवाज फाउंडेशन द्वारा मुंबई के बाजारों (जैसे मोहम्मद अली रोड और कुर्ला) से खरीदे गए ‘ग्रीन’ पटाखों के नमूनों की प्रयोगशाला में रासायनिक जांच कराई गई। इस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं कि बाजार में बिकने वाले अधिकांश ग्रीन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट जैसे अत्यधिक जहरीले और खतरनाक रसायन मौजूद थे। गौर करने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदूषण और स्वास्थ्य के खतरों के मद्देनजर बेरियम के इस्तेमाल पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
इसके अलावा, इन पटाखों पर छपे क्यूआर कोड में भी कई तरह की तकनीकी और कानूनी खामियां पाई गर्इं, जिससे यह साबित होता है कि बाजार में धड़ल्ले से फर्जी ग्रीन पटाखे बेचे जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत खतरनाक माने जाने वाले कई अन्य विषैली भारी धातुएं भी इन पटाखों में पाई गई हैं।
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इस तरह के मिलावटी और फर्जी ‘ग्रीन’ पटाखे केवल नाम के लिए पर्यावरण-अनुकूल हैं, जबकि हकीकत में ये आम जनता के स्वास्थ्य, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में अस्थमा व सांस की बीमारियों को और अधिक गंभीर बना रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों से इन पर कड़ी नजर रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।
