सितंबर में ४४.४० अरब डॉलर का माल निर्यात, आयात ७४.६१ अरब डॉलर; पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा की बढ़ती लागत के बीच बाहरी व्यापार पर दबाव
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
विदेशों में भारतीय माल की बिक्री से हुई कमाई के मुकाबले बाहर से सामान खरीदने का बिल कहीं बड़ा रहा। सितंबर में भारत का माल निर्यात ४४.४० अरब डॉलर दर्ज किया गया, जबकि आयात ७४.६१ अरब डॉलर पहुंच गया। दोनों के बीच ३०.२१ अरब डॉलर का अंतर देश के वस्तु व्यापार घाटे के रूप में सामने आया है। पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा की बढ़ती लागत ने व्यापार संतुलन की चुनौती को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
आंकड़े बताते हैं कि निर्यात से मिलने वाली रकम के मुकाबले आयात पर भुगतान काफी अधिक रहा। निर्यात बढ़ने का लाभ तभी व्यापार संतुलन में मजबूती से दिखाई देता है, जब आयात बिल उससे अधिक तेजी से न बढ़े। सितंबर की तस्वीर में यही अंतर चिंता का प्रमुख कारण है।
ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी आयात बिल पर दबाव डाल सकती है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता से आपूर्ति और परिवहन लागत प्रभावित होने की आशंका भी रहती है। हालांकि, कुल घाटे में ऊर्जा या अन्य वस्तुओं का कितना योगदान रहा, इसका सटीक आकलन वस्तुवार आंकड़ों से ही संभव होगा।
बड़ा व्यापार घाटा विदेशी मुद्रा की जरूरत बढ़ाता है। रुपये की विनिमय दर में बदलाव होने पर आयात की घरेलू लागत भी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, मशीनरी और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का आयात आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा होता है; इसलिए हर आयात को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। फिलहाल चुनौती निर्यात की रफ्तार बनाए रखने और आयात लागत के दबाव को संभालने की है।
