-बोले-क्या ढेलों का पंचनामा करें
-बेमौसम बारिश से फसलों को हुआ है नुकसान
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार में कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे का विवादों के साथ मानों चोली-दामन का साथ हो गया है। महाराष्ट्र में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश के कारण किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में किसान सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। इसी बीच कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने नासिक जिले के सिन्नर तालुका के दौरे के दौरान नुकसानग्रस्त फसलों का निरीक्षण करते हुए कहा था कि क्या ढेलों के पंचनामे करने हैं? उनके इस बयान से किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंची और विपक्ष ने उन पर तीखा हमला बोला। इस बीच कल फिर कोकाटे ने एक और बयान देकर खुद को फिर से विवादों में घेर लिया है।
उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय का मतलब सूने गांव की पटेलगीरी है। ऐसे में विपक्ष को महायुति सरकार को एक बार फिर से घेरने का मौका मिल गया है। संभाजीनगर में शुक्रवार की शाम आयोजित अखिल भारतीय किसान संगठन द्वारा आयोजित एमजीएम के आर्यभट्ट सभागृह में किसानों के मेधावी बच्चों के सम्मान समारोह में कृषि मंत्री कोकाटे ने कहा कि कृषि मंत्रालय का पद तो सूने गांव की पटेलगीरी जैसा है और मुझे यही मंत्रालय दिया गया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों को अधिक से अधिक सहायता देने की कोशिश कर रहे हैं। दो दिन पहले ही केंद्र सरकार ने १७ फसलों के लिए लगभग डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार भी किसानों के हित में प्रयासरत हैं। अजीत पवार ने मुझे जानबूझकर यह कृषि मंत्रालय सौंपा है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा
कोकाटे ने किसानों को यह सलाह भी दी कि उनके बच्चे कृषि से संबंधित शिक्षा लेकर खेती आधारित व्यवसाय में करियर बनाएं। कोकाटे के इस नए बयान के बाद एक और विवाद खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले उन्होंने हार्वेस्टिंग हो चुकी फसलों के पंचनामे करने से क्या फायदा? क्या ढेले का पंचनामा करें? जैसे बयान दिए थे। इसके बाद उन्होंने इस पर सफाई देते हुए कहा मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा।
