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योजना में बड़ा झोल… ‘लाडली बहनों’ का हक उड़ा ले गए ‘फर्जी’ भाई!..१२ हजार पुरुषों ने योजना के २३ करोड़ रुपए डकारे

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी लाडली बहन योजना में एक बड़ा और चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए शुरू की गई इस योजना का फायदा हजारों फर्जी भाइयों ने उठा लिया। जानकारी के अनुसार, करीब १२,७५७ पुरुषों ने योजना का लाभ लिया और सरकार के लगभग २३ करोड़ रुपए डकार गए।
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जहां अपात्र महिलाओं से तेजी से पैसे वसूले जा रहे हैं, वहीं इन पुरुष लाभार्थियों को अब तक एक साधारण नोटिस तक नहीं भेजा गया है। सरकारी आंकड़े खुद यह दर्शाते हैं कि सरकारी कर्मचारी और अधिक आय वर्ग की महिलाओं से बड़ी मात्रा में वसूली की जा चुकी है, कई मामलों में तो सीधे वेतन से कटौती भी की जा रही है। इसके उलट, पुरुषों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
‘लाडली बहन’ योजना में मिली गंभीर खामियां!
लाडली बहन योजना में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां सामने आई हैं। कई पुरुषों ने फर्जी लाभार्थी बनकर करोड़ों रुपए डकार लिए हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर पुरुषों के नाम पर आवेदन वैâसे मंजूर हुए और किस स्तर पर जांच प्रक्रिया फेल हुई? यह केवल तकनीकी लापरवाही है या इसके पीछे किसी प्रकार की मिलीभगत है, इस पर भी संशय गहराता जा रहा है।
ऐसे मामले से सरकार की कार्यप्रणाली पर अब सीधे सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ महिलाओं पर सख्ती दिखाई जा रही है, दूसरी ओर पुरुष लाभार्थियों को लेकर चुप्पी क्यों है? करीब २३ करोड़ रुपए की वसूली कब और वैâसे होगी, इसका स्पष्ट जवाब भी अभी तक सामने नहीं आया है। १२ हजार से ज्यादा पुरुषों को नोटिस तक न भेजे जाने से प्रशासन की मंशा पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है। सरकार ने जरूर कहा है कि सभी अपात्र लाभार्थियों से रकम वसूल की जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। जब तक पुरुषों पर भी समान रूप से कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम फेलियर और संभावित घोटाले के रूप में देखा जाता रहेगा। लाडली बहन योजना, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही थी, अब खुद सवालों के घेरे में है। मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही का भी बन गया है।

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