-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ६ रिफाइनरी स्वाहा
हिंदुस्थान, रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको, इक्वाडोर में एक ही पैटर्न
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक दुनिया के छह बड़ी रिफाइनरियों में बड़ी आग लग चुकी है। ऐसे में इसे साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है। लोग संभावना जता रहे हैं कि तेल की कीमतों में ‘आग’ लगाने के लिए संभवत: रिफाइनरियों में किसी बड़ी अंतर्राष्ट्रीय साजिश के तहत आग लगाई जा रही है। इस काम में कुछ बड़े अंतर्राष्ट्रीय प्लेयर्स के शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
बता दें कि कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजस्थान के पचपदरा में एक रिफाइनरी का उद्घाटन करना था। लेकिन उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले भीषण आग ने रिफाइनरी के मेन प्रोसेसिंग यूनिट्स को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे इसका उद्घाटन टालना पड़ा। एचपीसीएल की इस रिफाइनरी में लगी भीषण आग के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
तेल-गैस बने हथियार
हैरानी की बात यह है कि दुनिया भर में ऑयल एसेट्स, खासकर रिफाइनरियों में आग लगने की घटनाओं का एक पैटर्न नजर आ रहा है। यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच तेल और गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
१० तेल टैंकर जलकर भस्म!
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद से दुनियाभर में तेल रिफाइनरियों में आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। ताजा मामला भारत के राजस्थान और पड़ोसी देश म्यांमार का है। म्यांमार में वहां मॉबी रिवर पोर्ट पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसने १० से अधिक र्इंधन टैंकरों और जहाजों को अपनी चपेट में ले लिया। आग तेजी से पैâल गई और टैंकर धू-धू कर जलने लगे। इमरजेंसी टीमें आग पर पूरी तरह काबू पाने में नाकाम रहीं, और मंगलवार तक भी आग धधकती रही। एक यूजर ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘भारत की तेल रिफाइनरी में आग लगे अभी २४ घंटे भी नहीं हुए हैं और अब म्यांमार के होमालिन बंदरगाह पर हुए एक बड़े विस्फोट के बाद १० से अधिक र्इंधन टैंकरों को आग ने अपनी चपेट में ले लिया। यह अब हद से ज्यादा हो रहा है।’
अरविंद नाम के एक वेरिफाइड यूजर ने १६ अप्रैल को एक्स पर पोस्ट किया था, ‘भारतीय तेल रिफाइनरियों को सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए, खासकर अंदरूनी साजिश को लेकर।’ यह राजस्थान रिफाइनरी में आग लगने से चार दिन पहले का पोस्ट है। अरविंद ने अपने पोस्ट में कहा कि उन्हें एक बुरा अंदेशा था कि विरोधी देश में किसी तेल रिफाइनरी को निशाना बना सकते हैं। उन्होंने लिखा, ‘भूराजनीतिक कारणों से तेल की कीमतें बढ़ाने और भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए विरोधी रिफाइनरी में आग लगा सकते हैं।’ इसके ठीक चार दिन बाद, २० अप्रैल को एचपीसीएल की रिफाइनरी में आग लगने की घटना सामने आई।
साजिश का दावा
एक नॉर्थ अमेरिकन एक्स अकाउंट ने दावा किया कि दुनियाभर के ऑयल एसेट्स में आग लगने की ये घटनाएं सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि तेल आपूर्ति को बाधित करने का पैटर्न हो सकता है। एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी की घटना के बाद एक्स पर लिखते हुए अरविंद ने भी कहा कि अलग-अलग देशों में रिफाइनरियों में लग रही आग की घटनाएं वैश्विक स्तर पर रिफाइंड ऑयल सप्लाई को प्रभावित करने का संकेत हो सकती हैं। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए कहा, ‘एक पक्ष तेल की कमी पैदा करना चाहता है और इसके लिए पहले से तैयारी कर चुका है, जबकि दूसरा पक्ष तेल की भरपूर आपूर्ति बनाए रखकर दूसरे पर दबाव बनाना चाहता है।’ अब तक की जानकारी के मुताबिक, तेल रिफाइनरियों में आग की ये सभी घटनाएं, दुर्घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन एक पैटर्न नजर आ रहा है। अमेरिका में दो ऑयल एसेट्स, वैलेरो एनर्जी के पोर्ट आर्थर रिफाइनरी और मैराथन पेट्रोलियम के एल पासो रिफाइनरी में भी विस्फोट और आग की घटनाएं सामने आई हैं।
