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सिडको ने छीना नैना क्षेत्र के गांवों के नागरिकों का चैन! … कचरा जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण से हुए त्रस्त

सामना संवाददाता / मुंबई

नैना प्राधिकरण की सत्ता अपने हाथ में लेने वाली सिडको कॉर्पोरेशन ने इन गांवों में घन कचरा व्यवस्थापन की अनदेखी की है। यहां के व्यापारियों को प्रतिदिन पैदा होने वाले कचरे को जलाकर सड़ाना पड़ता है। इससे क्षेत्र में धुआं पैदा हो रहा है और यहां के नागरिकों को लगातार वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।
पनवेल तालुका में ७१ ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से ४६ ग्राम पंचायतें नैना परियोजना क्षेत्र में हैं। १५४ राजस्व गांवों के क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा दो नियोजन प्राधिकरणों, सिडको कॉर्पोरेशन और नैना प्राधिकरण को हस्तांतरित किया गया है। करंजडे बस्ती को सिडको बोर्ड में और ९५ गांवों को नैना परियोजना में शामिल किया गया है। २०१३ में जब नैना परियोजना की प्रारूप विकास योजना प्रकाशित हुई थी, तब यहां नियोजन प्राधिकरण के अधिकार नैना प्राधिकरण के पास सुरक्षित थे।
हालांकि, नैना प्राधिकरण ने इस ग्रामीण क्षेत्र में पानी, बिजली और घनकचरा व्यवस्थापन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। सिडको के जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि संबंधित मुद्दे की जानकारी लेने के बाद इस पर टिप्पणी करना उचित होगा।
ग्राम पंचायत का प्रबंधन खर्च फिर भी प्रशासन का असहयोग नैना परियोजना की घोषणा के १२ साल बीत जाने के बाद भी नगर परियोजना क्रमांक १ से १२ को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

नैना प्राधिकरण से सकारात्मक जवाब नहीं
इस बीच शहरी घनकचरा व्यवस्थापन के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर कई सामूहिक प्रयास किए गए। हालांकि, वे लंबे समय तक नहीं चले इसलिए पनवेल की ग्राम पंचायतों के मामलों की निगरानी करने वाली पंचायत समिति ने दो महीने पहले सिडको के संयुक्त प्रबंध निदेशक को एक पत्र लिखा और मांग की कि ग्राम पंचायत पनवेल के ग्रामीण इलाकों में गांवों में उत्पन्न ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए पैसा खर्च करे, लेकिन इस कचरे का निपटान करे। हालांकि, पंचायत समिति को अभी तक सिडको और नैना प्राधिकरण से सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। तालुका में ४६ से अधिक ग्राम पंचायतें नैना क्षेत्र में हैं और कुछ ग्राम पंचायतें सिडको क्षेत्र में हैं।

गांव स्तर पर घनकचरा व्यवस्थापन करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन वर्तमान में गांवों ने शहरों का रूप ले लिया है। इतनी बड़ी मात्रा में कचरा व्यवथापन करना असंभव है इसलिए हमने सिडको बोर्ड से भी सहयोग की मांग की है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही कोई समाधान निकलेगा।
-समीर वठारकर, गट विकास अधिकारी, पनवेल पंचायत समिति

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