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संपादकीय : एक बर्बाद कालखंड

मोदी को प्रधानमंत्री बने ११ साल हो गए हैं, इस बात को लेकर उनके भक्तों में खुशी का माहौल होना चाहिए। यह भक्त मंडली ही मोदी की असली ताकत है। पिछले ११ सालों में मौका मिलने के बावजूद मोदी देश के लिए कुछ खास नहीं कर पाए हैं। ११ वर्षों का उनका यह काल यानी बर्बाद कालखंड है। पहलगाम हमले के बाद पूरे देश में यह भावना और प्रबल हो गई है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सही नतीजा क्या निकला? मोदी के भक्त भी नहीं बता पाएंगे। ऐसा लग रहा था कि ११ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी भारत के दुश्मनों को कुचल देंगे और पाकिस्तान को हमेशा के लिए जमीन में गाड़ देंगे। हकीकत में चीन की मदद से पाकिस्तान और ज्यादा मुंहजोरी करने लगा है। कश्मीर घाटी में पाकिस्तान के हमलों की संख्या बढ़ती गई और पहलगाम पर हमला क्रूर और अमानवीय था। भारत ने पाकिस्तान पर हमला कर जवाबी हमला करना शुरू कर दिया। जब सेना पूरे जोश में थी, तब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप महाशय ने भारतीय सेना का मनोबल तोड़ दिया। ट्रंप महाशय ने मोदी को धमकाकर युद्ध रोकने कहा और भारत के प्रधानमंत्री ने युद्ध रोककर शरणागति स्वीकार ली। यह कोई कूटनीति नहीं है। फिर भी अगर विश्व भ्रमण से लौटे सांसदों को मोदी की कूटनीति दिख रही है और वे यह घोषित कर दें कि मोदी के समर्पण (सरेंडर) को कूटनीति ठहराकर इस कूटनीति को भारी प्रतिक्रिया मिली है तो यह देशभक्ति नहीं हो सकती। यह अच्छी तस्वीर है कि पहलगाम हमले और उसके बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मौके पर पूरा देश और सभी राजनीतिक दल प्रधानमंत्री मोदी के पीछे एकजुट हो गए, लेकिन हमेशा की तरह मोदी का रवैया ‘मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं’ वाला ही रहा। मोदी ने कांग्रेस और अन्य
विपक्षी दलों के नाम पर
स्यापा शुरू कर दिया। क्या भारत-पाकिस्तान युद्ध में राष्ट्रपति ट्रंप ने हस्तक्षेप किया? क्या राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद ‘नरेंदर’ मोदी झुक गए? जो प्रधानमंत्री इस ज्वलंत प्रश्न का उत्तर न दे, वह दुनिया का महान या कूटनीतिज्ञ कैसे हो सकता है? अब एक नया संकट सामने आ गया है। अमेरिका ने यह पहले ही स्वीकार किया है कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है। अलकायदा का लादेन पाकिस्तान में पनाह लिए हुए था और अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर लादेन को मारकर पाताल में गाड़ दिया। लादेन को पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का संरक्षण प्राप्त था। हालांकि, इसके बावजूद चौंकानेवाली खबर सामने आई है कि उसी पाकिस्तानी सेनाप्रमुख को अमेरिका ने अपने ‘आर्मी डे’ के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है। जहां भारत आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को विश्व में अलग-थलग करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के सेनाप्रमुख सैयद असीम मुनीर का अमेरिका के ‘आर्मी डे’ को मुख्य अतिथि के रूप में स्वीकार करना भारत की विदेश नीति और कूटनीति की विफलता का संकेत है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी दुनियाभर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजकर पाकिस्तान के आतंकी चेहरे को बेनकाब करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका पाकिस्तानी सेनाप्रमुख के लिए गलीचे बिछा रहा है। भारत के प्रति अमेरिका की भावनाएं क्या हैं और भारत ने मुनीर मामले में अभी तक अपनी नाराजगी क्यों नहीं जताई? अमेरिकी सेना के जनरल माइकल कुरीला ने एक ऐसा बयान दिया है, जो भारत के रुख से उलट है। ‘पाकिस्तान
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में
सक्रिय है’ जनरल माइकल कुरीला का यह सर्टिफिकेट देना, थोड़ा ज्यादती हो गई है। कुरीला यहीं नहीं रुके। हम पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखेंगे, ‘अमेरिकी सेनाप्रमुख ने यह भी कहा और उन्हें इस बात की परवाह नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी या भारत उनके इस बयान को क्या समझेंगे। पाकिस्तान के सेना प्रमुख मुनीर लगातार भारत विरोधी जहर उगलता रहा है। जनरल मुनीर का मानना ​​है कि भारत पर हमला करनेवाले आतंकवादी स्वतंत्रता सेनानी हैं और अमेरिका इसी मुनीर को सम्मान देने जा रहा है और उससे आतंकवाद पर चर्चा करने जा रहा है। २६ हिंदू महिलाओं के सिंदूर को उजाड़ने में मदद करनेवाला यह मुनीर अमेरिका का आधिकारिक अतिथि बनता है। प्रधानमंत्री मोदी इस पर चुप रहते हैं और भारतीय राजनेता इस चुप्पी के लिए मोदी को दुनिया का सबसे अच्छा ‘नीति निर्माता’ और ‘दूरदर्शी’ बताकर भारतीय सैनिकों की बहादुरी का अपमान करते हैं। पाकिस्तान का जनरल मुनीर हिंदुओं के नाम पर गालियां देता है। वही मुनीर अमेरिका का सम्मानित अतिथि बन जाता है। क्या इस बात से भाजपा के हिंदुत्व समर्थकों को चिढ़ और गुस्सा नहीं होना चाहिए? या इन अंधभक्तों ने अब ट्रंप की आरती भी शुरू कर दी है? जनरल मुनीर को बुलाकर अमेरिका ने भारत के जख्मों पर नमक छिड़का है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान से लंबे समय से लड़ रहा है। मुनीर का गौरव आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश है। मोदी के काल में यह सब हो रहा है। अगर कोई कहता है कि ११ साल का कालखंड बर्बाद हो गए तो इसमें गलत क्या है?

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