राजेश सरकार / प्रयागराज
भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों को आकर्षित करने को दिया गया स्लोगन सुरक्षा संरक्षा और समय अब सिर्फ लिखावट रह गया है। ताजा मामला 31 अगस्त का है। जब प्रयागराज की लूकरगंज निवासिनी श्रीमती श्वेता जैसवाल अपनी बहन के साथ चौरी चौरा स्टेशन से चौरी चौरा एक्सप्रेस के ए1 कोच में प्रयागराज के लिए बैठी। ट्रेन जैसे ही वाराणसी कैंट स्टेशन पहुंची। अटेंडेंट की वेशभूषा में पहुंचे युवकों ने जबरदस्ती श्वेता का पर्स छीनने लगे। श्वेता ने जब इसका विरोध किया तो बदमाशों ने उन्हें धक्का दिया और पर्स छीन चलती ट्रेन से कूद कर रफूचक्कर हो गए। घटना के तुरंत बाद श्वेता ने ट्रेन रोकने की कोशिश की लेकिन वहां पहुंचे अन्य अटेंडरों ने उन्हें जंजीर खींचने ही नहीं दिया। जिससे स्पष्ट अंदेशा लगाया जा सकता है कि इस मामले में कहीं न कहीं अन्य कोच सहायकों की भी संलिप्तता है। सेकेंड एसी कोच में भी बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। वो यात्रियों से बेखौफ लूटपाट कर रहे हैं। श्वेता जैसवाल की माने तो ट्रेन के गंतव्य से रवाना होने से लेकर घटना के वक्त तक ना तो उनका टिकट चेक हुआ था, न रेलवे पुलिस गश्त करती दिखी। यात्रियों की सुरक्षा की बड़ी बातें करने के बाद भी एसी कोच में ऐसी घटनाएं होती हैं तो सुरक्षा के लिए ट्रेन में चलने वाले सुरक्षा कर्मी कहां व्यस्त रहते हैं। सवाल यह है कि क्या लूटपाट में उनकी भी मिली भगत होती है। फिलहाल ये जांच का विषय है। हालांकि प्रयागराज जंक्शन पहुंच कर श्वेता ने जीआरपी थाने में तहरीर देकर लूटपाट का मामला दर्ज कराया है। उनका कहना है कि बदमाशों द्वारा लूटे गए पर्स में 15 हजार नकद, एटीएम कार्ड और अन्य जरूरी कागजात थे।
