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स्थानीय निकाय चुनावों में भी दिल्ली की ‘दखल’… विकास भूलकर मोदी की भक्ति में डूबी ‘महायुति’!

-दो हफ्ते तक पीएम के नाम पर राज्य में सरकार बजाएगी ‘ढोल’

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले ‘महायुति’ सरकार पर दिल्ली का ‘दखल’ बढ़ गया है। इसका परिणाम है कि महायुति सरकार पर विकास की बातें भूलकर पीएम मोदी की ‘भक्ति’ में डूबने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। दरअसल, कल सरकार ने एक शासनादेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि १७ सितंबर को मोदी का जन्मदिन है। इसलिए उस दिन से लेकर गांधी जयंती यानी दो अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा अभियान चलाया जाएगा, जिसमें लोगों की समस्याएं सुलझाई जाएंगी।
राज्यभर में ‘जलसा’ करके अपनी विफलता छुपाएगी ‘महायुति’!
इतना ही नहीं अफसरों पर भी दबाव डालकर नेताओं को शामिल करने का दबाव बनाया गया है। दूसरी तरफ विपक्ष का कहना है कि विकास के मुद्दों को दरकिनार कर सरकार जनता के पैसे का इस्तेमाल कर दो हफ्तों तक पीएम के नाम पर ‘ढोल’ बजाएगी, जिससे सरकारी यंत्रणा पर भारी दबाव पड़ेगा। इसी के साथ ही यह भी आरोप लग रहे हैं कि इस ‘जलसे’ के माध्यम से ‘महायुति’ अपनी विफलताओं को छिपाने और स्थानीय चुनावों में राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
उल्लेखनीय है कि महायुति सरकार ने पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती तक पूरे राज्य में ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाने का एलान किया है। राजस्व व वन विभाग की ओर से जारी शासनादेश में बताया गया है कि यह अभियान छत्रपति शिवाजी महाराज अभियान के तहत चलाया जाएगा और तीन चरणों में राज्यभर में लागू होगा। हालांकि, महायुति सरकार ने इस ‘सेवा पखवाड़े’ को तीन चरणों में बांटकर पूरी मशीनरी झोंकने का फरमान जारी किया है। पहले चरण में किसानों के खेतों को जोड़ने वाले कच्चे रास्तों का सर्वे होगा। दूसरे चरण में ‘सबको घर’ योजना के नाम पर जमीनों का बंटवारा दिखाया जाएगा, जबकि तीसरे चरण में जिलाधिकारी अपनी-अपनी तरफ से `नवीन उपक्रम’ चलाएंगे। सरकार की ओर से हिदायत दी गई है कि हर स्तर पर सांसद, स्थानीय विधायक, विधान परिषद सदस्य, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति के सदस्य और ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। इससे यह साफ है कि यह पूरा आयोजन विकास कार्यों से ज्यादा सत्ताधारियों की ‘राजनीतिक भक्ति’ का प्रदर्शन है।
प्रचार है प्राथमिकता
जनता के टैक्स से चलने वाली सरकारी मशीनरी अगर नेताओं की भक्ति में ही उलझी रहे तो असली लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों का क्या होगा? महायुति सरकार का यह कदम साफ करता है कि सत्ता के लिए विकास नहीं, बल्कि दिखावा और प्रचार ही प्राथमिकता है। नतीजा वही होगा कि जनता परेशान और सरकार ‘भक्ति अभियान’ की कामयाबी के ढोल पीटती नजर आएगी।
अफसरों को साफ आदेश
शासनादेश में विभागीय आयुक्त से लेकर तहसीलदार तक सभी अफसरों को साफ आदेश दिया गया है कि अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर रोजाना बैठकें करें। प्रगति रिपोर्ट तैयार करें और व्यापक प्रचार-प्रसार करें। आदेश में कहा गया है कि हर हाल में इस ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान को सफल बनाया जाए।

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