समाजवादी पार्टी से अलग होकर अपनी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाने वाले शिवपाल सिंह यादव ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी ने उनको पार्टी में शामिल होने का ऑफर दिया था। हालांकि, उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करने के बजाय अपनी खुद की पार्टी बनाना उचित समझा। इटावा में एक निजी स्कूल के शुभारंभ के मौके पर शिवपाल यादव ने ये बात कही।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि बेशक उन्होंने अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी का गठन कर लिया था, लेकिन आज भी उनके अपने लोग उनके दल को बीजेपी की बी टीम बता कर तरह-तरह की चर्चाएं करते थे। उन्होंने कहा कि उनका निर्णय गलत नहीं था। बहुत सोच-समझकर उन्होंने पार्टी बनाने का निर्णय लिया। आज बीजेपी की जो स्थिति है, वह किसी से छुपी नहीं है। हर ओर पार्टी का विरोध जनता करने लगी है।
विधानसभा चुनाव २०२२ के मद्देनजर समाजवादी पार्टी से गठबंधन को लालायित शिवपाल ने सपा-बसपा गठबंधन पर तंज कसा और कहा कि बसपा-सपा के बीच गठबंधन हो चुका है और नतीजा भी सबके सामने आ चुका है। अब अगर बसपा-भाजपा की दोस्ती हो रही है तो फिर भाजपा को क्या फायदा पहुंचेगा, यह तो तब पता चलेगा जब नतीजे आएंगे।
योगी आदित्यनाथ को सलाह
लव जिहाद पर कानून बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर शिवपाल ने कहा कि पहले से ही बहुत से कानून बने हुए हैं। उनका सही ढंग से क्रियान्वयन किया जाए तो किसी और कानून की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को समझाने के लिए नैतिक शिक्षा का इंतजाम किया जाए तो ये बहुत बेहतर रहेगा।
मायावती पर भी निशाना
मायावती पर निशाना साधते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि बहन जी के बारे में हर कोई बहुत अच्छे से जानता है कि उनका इतिहास वैâसा रहा है। नेता जी को भी उन्होंने बदनाम किया, जबकि नेताजी आज की तारीख में हर दल के लिए सर्वमान्य नेता बने हुए हैं। बीजेपी से मिलकर बीएसपी ने तीन बार सरकार बनाई। अब अगर बसपा के विधायक टूट रहे हैं तो फिर इसमें किसी और का क्या कुसूर है।
