सामना संवाददाता / मुंबई
ठाणे के नागरिकों को सुविधा प्रदान करने के लिए मनपा ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च करके विकास कार्य किए, परंतु इस स्मार्ट सिटी की वाट लग गई है। कोपरी वाटरफ्रंट का तीन-तेरह हो गया है। नागरिकों द्वारा अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि ठाणे की स्मार्ट सिटी में स्मार्ट घोटाला किया गया है क्या?
बताया जाता है कि कोपरी के एंफीथिएटर में दरारें पड़ गई हैं और सीटें टूट गई हैं। चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि ऐतिहासिक तोप का स्टैंड भी उखड़ गया है। गौरतलब हो कि ठाणे शहर में स्मार्ट सिटी योजना के तहत कई जगहों पर बड़े ही धूमधाम से काम हुए। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्वाचन क्षेत्र कोपरी में इन कामों की पोल खुल गई है।
महज ढाई साल में कोपरी वाटरफ्रंट के विकास का वाट लग गया है। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि यह परियोजना पूरी तरह से बेकार हो गई है और हमारे लिए इसका कोई उपयोग नहीं रह गया है। अगर उप मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में यह हाल है तो बाकी जगहों का क्या हाल होगा, ऐसा सवाल ठाणेकर पूछ रहे हैं।
बताया जाता है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत कोपरी में एक एंफीथिएटर बनाया गया था। इसी तरह वहां एक बगीचा, पार्विंâग, जेट्टी रोड का नवीनीकरण और शौचालय जैसी सुविधाएं भी बनाई गई थी, लेकिन असल में एंफीथिएटर की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। बेंच टूट गई हैं और तोपों के स्टैंड उखड़ने की स्थिति में हैं।
ठेकेदार हो ब्लैकलिस्ट
इसको लेकर कांग्रेस ने मांग की है कि घटिया काम करने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए और इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया जाए। बता दें कि ठाणे में स्मार्ट सिटी के काम पर पहले भी कई गंभीर आरोप लगे थे। तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस पर ध्यान दिया और जांच के आदेश दिए थे, लेकिन वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
