-ई २० पेट्रोल के खिलाफ कैंपेन बढ़ा-चढ़ाकर हुआ पेश, केंद्रीय मंत्री का छलका दर्द
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ जमकर साजिश की जा रही है। उन्होंने गुरुवार को यह दावा किया कि सरकार की ओर से इथेनॉल-मिश्रित ईंधन की शुरुआत के विरोध के बीच, सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ पैसे देकर राजनीतिक अभियान चलाए गए थे। हालांकि, उन्होंने इस साजिशकर्ता के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर गडकरी के खिलाफ ये साजिश कौन कर रहा है।
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के ६५वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि ई २० पेट्रोल, जिसमें पारंपरिक ईंधन के साथ २० प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है, इसके खिलाफ ऑनलाइन कैंपेन बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इथेनॉल से मिला ईंधन सुरक्षित है और इसे गाड़ी निर्माता कंपनियों की ओर से भी अप्रूव किया गया है। साथ ही एआरएआई और सुप्रीम कोर्ट ने ई २० कार्यक्रम पर स्पष्टता दे दी है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर मेरे खिलाफ पेड अभियान चलाया गया था।
दरअसल, ईंधन में ई २० के अप्रूव पर रोक लगाने वाली मांग और पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल अनिवार्य करने की डिमांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसके बाद सरकार के सामने आ रही कानूनी बाधा दूर हो गई।
इथेनॉल मिश्रण से ईंधन उत्सर्जन होगा कम
वहीं वाहन बनाने वाली कंपनियों और ईंधन आपूर्तिकर्ताओं ने भी कहा कि ई २० के लिए डिजाइन की गई गाड़ियों की वारंटी मान्य रहेगी। साथ ही सिर्फ ईंधन के प्रयोग से गाड़ियों की माइलेज कम होती है और ये पुराने वाहन को नुकसान पहुंचाता है। उद्योग विशेषज्ञों और कुछ सर्विस गैराजों ने भी २०२३ से पहले के मॉडल के मालिकों की शिकायतों की सूचना दी। सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से तेल आयात में कमी आएगी, उत्सर्जन कम होगा और किसानों की आय बढ़ेगी। ई २० पेट्रोल की अनिवार्य बिक्री को लेकर पिछले हफ्ते सरकार की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई।
