मुस्लिम दुनिया का एक मुल्क जिस पर ये तोहमत हमेशा लगती रही कि वो गाजा को लेकर सीरियस नहीं है या अमेरिका के इस कदर प्रभाव में है कि उसे गाजा में इजरायल की आक्रामकता दिख ही नहीं रही। लेकिन पिछले कई माह से उस मुल्क की खामोशी दरअसल उसकी कूटनीति या डिप्लोमेसी थी और अब वो गाजा और फिलिस्तीन के लिए जबरदस्त फिल्डिंग सजा चुका है, जिसने इजरायल की नाक में दम कर दिया है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं सऊदी अरब की। सऊदी के मुखिया क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिडिल ईस्ट की सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट बताती है कि सऊदी अरब पूरे सीन में तब तक साइलेंट रहा, जब तक ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर इजराइल और अमेरिका ने कार्रवाई नहीं कर दी। अमेरिकी कार्रवाई के बाद से जब ईरान फिलहाल चुप है और अपनी अगली रणनीति पर काम कर रहा है तब सऊदी एक्टिव हुआ है। सऊदी के क्राउन प्रिंस एमबीएस ने ऐसा पांसा फेंका है कि इजरायल फंस गया है। सऊदी ने सबसे पहले गाजा को लेकर अरब मुल्कों और मुस्लिम मुल्कों को एकजुट करना शुरू कर दिया है।
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जानते हैं कि इजरायल के फौजी ताकत से निपटना और लंबे वक्त तक जंग करना दोनों में एनर्जी, वक्त और पैसा सब कुछ बर्बाद होता है। जिस तरह से सऊदी ने खुद को मिडिल ईस्ट में अपनी ऑइल इकोनॉमी के दम पर खड़ा किया है, जंग में उलझकर उसे तबाह करना आज के दौर की सबसे बड़ी बेवकूफी होगी। यही वजह है कि सऊदी ने मौका देखकर चौका मारा है और पहले अरब मुल्कों को साथ लिया इसके बाद सऊदी ने फिलिस्तीन को लेकर टू स्टेट मुहिम की शुरुआत की। खुद मोहम्मद बिन सलमान इसको लेकर यूरोपीय लीडरान से मिल रहे हैं। उन्होंने प्रâांस और ब्रिटेन को इस बात पर राजी कर भी लिया कि वो आजाद फिलिस्तीन की हिमायत करें और ऐसा हो भी रहा है। ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने फिलिस्तीन को तस्लीम करने का पैâसला किया है। वो १४५ से ज्यादा देशों में शामिल हो गए हैं, जो पहले से फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं। फिर सऊदी ने प्रâांस को रिझाया। सऊदी ने प्रâांस पर ऐसा जादू किया कि प्रâांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फिलिस्तीनी लोगों के लिए न्याय करने और इस तरह गाजा, वेस्ट बैंक और यरुशलम में फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने का वक्त आ गया है।
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बहुत तेजी से शुरू हुए प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। गाजा में अगर नई सरकार बनती है तो इसकी जिम्मेदारी मिस्र, सऊदी और जॉर्डन जैसे देशों के जिम्मे है। कतर खुद पर हमला होने के बाद भी मिडिएटर की भूमिका में है, लेकिन उसमें सऊदी का रोल ही अपने आप अहम बन जाएगा।
