सामना संवाददाता / मुंबई
कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद सीमा में हुए अनधिकृत निर्माणों की जानकारी देने में आनाकानी कर रहे मुख्याधिकारी को मुंबई हाई कोर्ट ने जमकर आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए मुख्याधिकारी को आदेश दिया कि कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद क्षेत्र के अनधिकृत निर्माणों के बारे में जानकादी दें, वर्ना हम कार्रवाई करेंगे। कोर्ट ने मुख्याधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि अनधिकृत निर्माण को प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है, यह आश्चर्य की बात है।
कोर्ट ने नगर परिषद के मुख्याधिकारी को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे दो सप्ताह के भीतर बदलापुर में अनधिकृत निर्माणों की जानकारी नहीं देते हैं, तो कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। बदलापुर में विकासकर्ता ए प्लस लाइफ स्पेसेस द्वारा एक निर्माण कार्य किया गया है और सोसायटी का सीवेज त्रिशूल गोल्डन विले हाउसिंग सोसाइटी परिसर में बह रहा है। यशवंत भोईर ने एडवोकेट अविनाश फटांगरे और एडवोकेट अर्चना शेलार के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई। गत १४ अगस्त की सुनवाई में अदालत ने बदलापुर में अनधिकृत निर्माणों का सर्वेक्षण करने और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का आदेश मुख्याधिकारी को दिया था। मुख्याधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन न करते हुए अनधिकृत निर्माण के बारे में कोर्ट को जानकारी देने में टालमटोल कर रहे थे। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए दो सप्ताह के भीतर सभी अनधिकृत निर्माणों की जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
