हिमांशु राज
आजम खान की जेल से रिहाई उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सियासी तूफान लेकर आई है। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद उनकी सक्रियता ठहर गई थी, लेकिन अब उनकी वापसी से राजनीतिक समीकरणों में भारी बदलाव की संभावना है। उन्होंने कहा है कि फिलहाल वे राजनीति से दूर रहेंगे और अपनी सेहत पर ध्यान देंगे, लेकिन सभी दल इस बात पर सतर्क हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा और किस दिशा में रहेगा। उनकी वापसी से न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि पूरे प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा असर पड़ेगा।
समाजवादी पार्टी में आजम खान की पुरानी पकड़ और मुस्लिम नेतृत्व के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। लेकिन नए नेतृत्व के आने और पार्टी में बदलते समीकरणों ने उनकी पहले जैसी स्थिति को चुनौती दी है। अब सवाल यह है कि क्या वे समाजवादी पार्टी में ही अपनी जगह बनाएंगे या फिर किसी नए राजनीतिक रास्ते पर चलेंगे। दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी भी एक विकल्प के तौर पर सामने आई है। यदि आजम बीएसपी का हाथ थामते हैं तो इससे प्रदेश की दलित-मुस्लिम समीकरण में बदलाव आ सकता है और यह भाजपा सहित अन्य दलों के लिए चुनौती पैदा करेगा। आजम खान के दोनों बेटे, अब्दुल्ला और अदीब आजम भी राजनीति में सक्रिय हैं। अब्दुल्ला ने चुनाव भी लड़ा है और अपनी युवा छवि के कारण क्षेत्र में पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अदीब भी राजनीति में धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहे हैं। यह परिवार की राजनीतिक विरासत को मजबूत करने की रणनीति को दर्शाता है। रामपुर जो आजम खान का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, वहां उनकी वापसी से सपा कार्यकर्ताओं को जोश मिलेगा और विपक्षी दलों की रणनीतियां प्रभावित होंगी। आजम खान की रिहाई प्रदेश की राजनीति में नए सियासी गठबंधनों और ध्रुवीकरण की संभावनाओं को जन्म देगी। बीजेपी समेत सभी राजनीतिक दल उनके हर कदम पर कड़ी नजर रखेंगे, क्योंकि उनका मुस्लिम वोट बैंक पर प्रभाव चुनावी समीकरणों को खासा प्रभावित कर सकता है। आनेवाले चुनावों में आजम की सक्रियता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और उनके राजनीतिक पैâसले पूरे प्रदेश के राजनीतिक नक्शे को बदल सकते हैं। फिलहाल सेहत ठीक होने के बाद उनका अगला राजनीतिक कदम प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करेगा।
