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ई-केवाईसी के झमेले ने महिलाओं की दिवाली बिगाड़ी! … पोर्टल की तकनीकी खामियों से जूझ रही हैं महिलाएं

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र सरकार की बहुचर्चित मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार वजह है सरकार का ऐन त्योहारों के मौके पर ई-केवाईसी को लेकर लिया गया जल्दबाजी भरा फैसला।
एक तरफ सरकार दावा कर रही है कि करोड़ों महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है, वहीं हकीकत यह है कि ई-केवाईसीr के नाम पर हजारों महिलाएं पोर्टल की तकनीकी खामियों से जूझ रही हैं और योजना का लाभ मिलने से पहले ही उनका सब्र जवाब दे रहा है।
सरकार ने त्योहारों के मौसम में ई-केवाईसी प्रक्रिया करने का फैसला किया है। ई-केवाईसी प्रक्रिया करते समय व्ाâुछ लाभार्थियों के मोबाइल नंबर मैच नहीं हो रहे हैं, वेबसाइट में त्रुटियां आ रही हैं, आधार ओटीपी नहीं आ रहा है आदि तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए लाडली बहनों की सरकार से मांग है कि वह इस पोर्टल में तुरंत सुधार करे।
इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रियाएं भी की जा रही हैं, लेकिन ऑनलाइन ई-केवाईसी करते समय लाभार्थी महिलाओं को कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ई-केवाईसी के लिए उपलब्ध आधिकारिक वेबसाइट पर तकनीकी खराबी है। जिसके कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। आधार नंबर दर्ज करने के बाद ओटीपी समय पर नहीं आता या आता ही नहीं, जिससे सत्यापन प्रक्रिया रुक जाती है। ओटीपी आने के बाद भी उसे मोबाइल में दर्ज करने का विकल्प नहीं होता या प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती। चूंकि एक ही समय में बड़ी संख्या में बहनें ई-केवाईसी कर रही हैं, इसलिए सर्वर पर दबाव पड़ रहा है, जिससे वेबसाइट की कार्यक्षमता कम हो रही है। इसलिए शुरुआत में कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करने के कारण बहनों में नाराजगी है। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्ूूज्े://त्a्aव्ग्ंaप्ग्ह.स्aप्araेप्ूra.ुदन्.ग्ह पोर्टल के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया चल रही है। लाभार्थियों को यह प्रक्रिया अगले दो महीनों के भीतर पूरी करनी होगी। पोर्टल पर सभी जानकारी स्पष्ट रूप से दी गई है और मार्गदर्शन की सुविधा भी उपलब्ध है।
बहनों में गुस्सा, सरकार पर तंज
लाभार्थी महिलाओं का साफ कहना है कि सरकार ने तो योजना दी, पर सुविधा नहीं। कई जगहों से ये खबरें भी आईं कि महिलाएं दिनभर लाइन में लगने के बाद खाली हाथ लौट रही हैं। न वेबसाइट चलती है, न मदद मिलती है।

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