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दरों में कटौती मात्र दिखावा… मोदी ने जीएसटी घटाने में भी कर डाला घपला!

-कच्चे माल पर बोझ बढ़ाकर सरकार ने आंखों में झोंकी धूल

केंद्र सरकार ने हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती का बड़ा एलान कर जनता को राहत देने का दावा किया है। पीएम मोदी ने तो यहां तक इसे जश्न मनाने का मौका तक बता दिया। लेकिन विपक्ष ने इस पैâसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मोदी सरकार ने एक हाथ से जीएसटी की कटौती की है तो दूसरे हाथ से जीएसटी का बोझ गरीब जनता पर डाल दिया है। सरकार ने जहां पक्के माल पर जीएसटी कम किया है। वहीं कई मामलों में कच्चे माल पर जीएसटी बढ़ा दी गई है, जिसका जिक्र कहीं नहीं किया गया। इससे साफ है कि सरकार जीएसटी घटाने या बढ़ाने का खेल-खेल रही है। उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है और आम जनता को कोई खास फायदा भी नहीं हुआ है, सिर्फ इसके सिर से टोपी उसके सिर पर लगा दी गई है।
जानकारों की मानें तो पॉलिस्टर के कपड़े के पक्के माल पर जीएसटी १८ से घटाकर १२ प्रतिशत करना केवल दिखावा किया है, जबकि कच्चा माल मतलब जिसका पॉलिस्टर कपड़ा बनता है, उस पर जीएसटी ६ प्रतिशत टैक्स दरें बढ़ा दी हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे माल की जीएसटी बढ़ने से उद्योग जगत की उत्पादन लागत में सीधा इजाफा होगा। इसका असर अंतत: उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा और महंगाई कम होने के बजाय और बढ़ सकती है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि जनता को राहत देने का नाटक किया जा रहा है, जबकि असल में उद्योग और आम आदमी दोनों पर बोझ डाला जा रहा है। वहीं सरकार का दावा है कि जीएसटी ढांचे में किए गए बदलाव संतुलित हैं और इसका फायदा लंबे समय में उपभोक्ताओं को मिलेगा। कुल मिलाकर, जीएसटी दरों में की गई यह `कटौती’ एक दिखावा साबित हो रही है और भाजपा इसका राजनीतिक लाभ लेने के लिए गलत ढंग से प्रचार कर रही है।

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