मुख्यपृष्ठस्तंभजैन समाज की आर्थिक शक्ति और “जैन फंड” का स्वप्न

जैन समाज की आर्थिक शक्ति और “जैन फंड” का स्वप्न

 भरतकुमार सोलंकी, वित्त विशेषज्ञ

भारत का सामाजिक ढांचा हमेशा से इस तथ्य को मान्यता देता आया है कि हर समाज की वास्तविक ताकत उसकी आर्थिक स्थिति में छिपी होती है। जैन समाज ने व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में बीते सौ वर्षों में जो पहचान बनाई है, वह किसी से छिपी नहीं है। चाहे वह दवा उद्योग हो, आभूषण निर्यात हो, रियल एस्टेट हो, मीडिया हो या फिर अंतरिक्ष और विज्ञान का क्षेत्र—जैन उद्यमियों ने अपनी मेहनत और दृष्टि से देश को गौरवान्वित किया है।

व्हाट्सएप ग्रुपों में अक्सर हमें संदेश मिलते हैं कि सन फार्मा के दिलीप सांघवी, इसरो के डॉ. विक्रम साराभाई, जैन इरिगेशन के भवरलाल जैन, बीएसई के प्रेमचंद रॉयचंद या फिर इंडिगो एयरलाइंस के राकेश गंगवाल जैसे नाम जैन समाज की उपलब्धियों को दर्शाते हैं। यह सूची गौरवपूर्ण है, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि इतने बड़े और परिश्रमी समाज से केवल 16–20 नाम ही राष्ट्रीय स्तर पर सामने क्यों आते हैं? क्या हमारी क्षमता इतनी ही है? असल में, यह सूची छोटी हैं और यह हमें ख़ुद को संतोष देने के बजाय चिंतन और प्रेरणा दोनों देनी चाहिए।

पारसी समाज का उदाहरण हमारे सामने है। टाटा समूह के शेयर हर पारसी परिवार के निवेश पोर्टफोलियो में दशकों से मौजूद हैं। इस विश्वास और सामूहिक निवेश ने टाटा समूह को और भी मजबूत बनाया, साथ ही पारसी समाज को स्थायी आर्थिक सुरक्षा दी। यही मॉडल जैन समाज भी अपना सकता है।

आज जरूरत है कि जैन समाज केवल उद्यमिता पर गर्व न करे, बल्कि अपने उद्यमियों में निवेश और विश्वास भी दिखाए। अगर हम अपने उद्यमियों की कंपनियों को ही मजबूत करने के लिए पूँजी लगाएंगे, तो इसका प्रतिफल पूरे समाज की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा।

इसी कड़ी में, एक ठोस सुझाव यह हैं कि अग्रणी एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ—जैसे मोतीलाल ओसवाल AMC—एक विशेष “जैन फंड” लॉन्च करे। इस फंड का पोर्टफोलियो शोध और विश्लेषण के आधार पर उन प्रमुख जैन-स्थापित कंपनियों से बने, जो देश और दुनिया के बाजारों में पहले से ही सिद्ध हो चुकी हैं। देश-विदेश के जैन निवेशक के अलावा जैन समाज के उद्यमियों पर भरोसा करने वाले अन्य जाति के निवेशक भी इस फंड में विश्वासपूर्वक निवेश कर सकते हैं और इस प्रकार जैन उद्यमियों पर अपना भरोसा भी जताएंगे।

यह “जैन फंड” केवल एक निवेश साधन नहीं होगा, बल्कि यह जैन समाज की सामूहिक आर्थिक चेतना का प्रतीक बनेगा। इससे आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश जाएगा कि त्याग और साधना के साथ-साथ, जैन समाज की असली ताक़त उद्यमिता और निवेश में भी हैं।

आज वक्त हैं कि हम केवल 16–20 नामों पर गर्व न करे, बल्कि आने वाले समय में देश की टॉप 500 सूची में से 250 नाम जैन समाज के हो। और इस यात्रा का पहला कदम यही है—अपने उद्यमियों पर विश्वास करे और जैन फंड के माध्यम से उस विश्वास को निवेश में बदले।

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