द्रुप्ति झा / मुंबई
शहर में फेरीवालों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इनके अतिक्रमण से राहगीर परेशान हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। सुबह व शाम में जब स्टेशनों पर अधिक भीड़ होती है तो यात्रियों की रफ्तार इन अवैध फेरीवालों की वजह से धीमी हो जाती है। दादर-वेस्ट में स्टेशन के बाहर जब ‘दोपहर का सामना’ के संवाददाता ने जायजा लिया तो पाया कि स्टेशनों से जुड़े हुए स्काईवॉक और सड़कों पर फेरीवालों ने अपना अड्डा बना लिया है और प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम अवैध तरीके से यह अपना धंधा कर रहे हैं। कुछ फेरीवालों से बात करने पर पता चला कि वह मनपा और रेलवे पुलिस को हफ्ता देकर स्टॉल लगाते हैं।
दादर रेलवे स्टेशन के आस-पास मनपा की गाड़ी खड़ी होने के बावजूद भी दादर की सड़कों पर फेरीवालों का कब्जा किया जा रहा है, जबकि मुंबई में रेलवे स्टेशन के १५० मीटर के दायरे में फेरीवालों का होना वर्जित है, फिर भी फुटपाथों पर अवैध फेरीवाले जमे हुए हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट के एक पैâसले के अनुसार, रेलवे स्टेशनों से १५० मीटर की दूरी के भीतर फेरी लगाने की अनुमति नहीं है, क्योंकि यात्रियों के चलने के लिए बनाए गए फुटब्रिज और ओवरब्रिज पर फेरीवालों के बैठने से सुरक्षा और यातायात के लिए बाधा उत्पन्न होती है, जिस वजह से फेरीवालों को बैठने की इजाजत नहीं दी गई है।
क्या कहता है नियम?
बता दें कि एल्फिंस्टन रोड ब्रिज पर हुई भगदड़ के बाद मुंबई हाई कोर्ट ने मनपा को जमकर लताड़ा था। इसके बाद कोर्ट ने कहा था कि रेलवे स्टेशनों से १५० मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार के फेरीवाले नहीं होने चाहिए, वहीं पूजा स्थल व शिक्षा संस्थानों के १०० मीटर के दायरे में भी फेरीवालों का जमावड़ा नहीं होना चाहिए। ऐसे में फेरीवालों का रेलवे स्टेशनों पर होना हाई कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा रहा है। मुंबई हाई कोर्ट के नियमों की अनदेखी हो रही है। प्रशासन सो रहा है। मनपा का चुनाव लंबित है। ऐसे में मनपा को देखनेवाला कोई नहीं है। कोई पारदर्शिता नहीं है। जल्द से जल्द मनपा को फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
