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न्यूज स्कैन : पत्नी के लव अफेयर ने मचाई तबाही… पति ने लगाई फांसी… ३ बच्चे अनाथ!

खुशबू सिंह

वैवाहिक जीवन की कड़वी सच्चाई एक बार फिर तब सामने आई, जब यूपी के हाथरस जिले में पत्नी के कथित लव अफेयर से आहत एक युवक ने आत्महत्या कर ली। ये दर्दनाक घटना इसी साल सितंबर महीने की है, जहां ३३ वर्षीय पुष्पेंद्र ने फांसी के फंदे पर झूलकर अपनी जान दे दी। पुष्पेंद्र सब्जी मंडी में पल्लेदारी का काम करता था और तीन मासूम बच्चों का पिता था। ये मामला न केवल परिवारिक विघटन को उजागर करता है, बल्कि अवैध संबंधों के दुष्परिणामों पर गंभीर सवाल उठाता है। आइए जानते हैं इस हृदयविदारक घटना की पूरी डिटेल्स।
शादीशुदा जीवन और ३ बच्चे
पुष्पेंद्र की शादी करीब ९ साल पहले रजनी से हुई थी। दंपति के तीन बच्चे हैं। दो बेटियां और एक बेटा। परिवार सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन पिछले कुछ समय से रजनी का व्यवहार बदल गया। परिजनों के अनुसार, रजनी का मोहल्ले के ही एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। ये युवक भी सब्जी मंडी में पल्लेदारी करता था। अफेयर की खबरें गांव में पैâलने लगीं, जिससे पुष्पेंद्र मानसिक रूप से टूटने लगा।
बच्चों को छोड़ प्रेमी संग भागी
परिजनों का गंभीर आरोप है कि रजनी तीनों बच्चों को घर पर छोड़कर प्रेमी के साथ चली गई। ये घटना कुछ दिन पहले की बताई जा रही है। पुष्पेंद्र अकेले बच्चों की देखभाल कर रहे था और पत्नी की बेवफाई से गहरा सदमा लगा था। वो बार-बार रजनी को समझाने की कोशिश करता, लेकिन बात नहीं बनती। घटना के दिन पुष्पेंद्र सब्जी मंडी गया, जहां वह पत्नी के प्रेमी युवक से मिला। दोनों के बीच पत्नी को लेकर तीखी बहस हुई। गवाहों के मुताबिक, कहासुनी इतनी बढ़ गई कि पुष्पेंद्र गुस्से और दुख में घर लौट आया।
फांसी के फंदे पर लटका मिला शव
घर पहुंचते ही पुष्पेंद्र ने कमरे में फांसी लगा ली। पड़ोसियों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब दरवाजा तोड़ा गया तो पुष्पेंद्र फंदे पर लटका मिला। स्थानीय लोग उसे तुरंत जिला अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मौत का कारण गला घोंटना बताया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।
पुलिस जांच और सामाजिक संदेश
हाथरस पुलिस ने प्रेमी युवक से पूछताछ शुरू की। परिजनों ने आत्महत्या के लिए रजनी और उसके प्रेमी को जिम्मेदार ठहराया। ये घटना वैवाहिक विश्वासघात के खतरों को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में काउंसलिंग और कानूनी मदद जरूरी है। पुष्पेंद्र जैसे पीड़ितों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिलनी चाहिए। ये दुखद घटना हमें सिखाती है कि रिश्तों में पारदर्शिता और संवाद कितना महत्वपूर्ण है। तीन अनाथ बच्चे अब बिना माता-पिता के हैं। समाज को ऐसे मामलों पर जागरूक होना होगा ताकि परिवार टूटने से बचें।

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