रामदिनेश यादव
देश की राजधानी नई दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर आना चाहिए था, लेकिन महाराष्ट्र में हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। राज्य की महायुति सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिखाई जा रही ढिलाई और असंवेदनशीलता अब जनता और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता का विषय बन चुकी है। महायुति सरकार ने अलर्ट के लिए निर्देश तो दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई खास हलचल और सुरक्षा की तैयारी नजर नहीं आई, जबकि मुंबई कई बार आतंकियों के निशाने पर रह चुकी है।
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली धमाकों के बाद मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे प्रमुख शहरों के लिए संभावित खतरे के अलर्ट जारी किए थे। इसके बावजूद महाराष्ट्र में सुरक्षा तैयारियों का हाल चिंताजनक है। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, दादर और अंधेरी जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर मेटल डिटेक्टर खराब पड़े हैं, वहीं कई मॉल्स और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी वैâमरे या तो बंद हैं या उनकी मॉनिटरिंग नहीं हो रही। सुरक्षा जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। मुंबई और पुणे में आम नागरिकों के बीच डर का माहौल है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब दिल्ली जैसी कड़ी सुरक्षा वाले शहर में धमाके हो सकते हैं तो मुंबई जैसे मेट्रो शहर कितने सुरक्षित हैं?
एक पूर्व पुलिस आयुक्त ने कहा है कि हर धमाके के बाद हम थोड़े दिन सतर्क रहते हैं और फिर सबकुछ सामान्य मान लेते हैं। यही ढिलाई हमें दोहराए जानेवाले हादसों की ओर ले जाती है। सुरक्षा विश्लेषक सेना के पूर्व अधिकारी एस.एस. नायर के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार को अब ‘रिएक्टिव’ नहीं बल्कि ‘प्रो-एक्टिव’ रणनीति अपनानी होगी। सुरक्षा में निवेश को खर्च नहीं, बल्कि प्राथमिकता मानना चाहिए।
शिवसेना और कांग्रेस ने सरकार पर जनता की जान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। विपक्ष ने कहा कि दिल्ली में धमाके हुए और महाराष्ट्र में सत्ता मौज में है। अगर मुंबई में कुछ हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? कांग्रेस के नेता सुरेश राजहंस ने भी कहा कि सरकार केवल बयानबाजी में व्यस्त है। ग्राउंड पर कोई ठोस सुरक्षा प्लान नहीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली धमाकों के बाद महाराष्ट्र सरकार को सुरक्षा मोर्चे पर तत्काल सख्त कदम उठाने की जरूरत है। सुरक्षा ढांचे की समीक्षा, उपकरणों की मरम्मत और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाना अब समय की मांग है। वरना लापरवाही की यह कीमत राज्य को बहुत भारी पड़ सकती है।
जबकि मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया है कि राज्य में सभी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और मुंबई पुलिस के साथ एटीएस तथा एनआईए लगातार समन्वय में काम कर रही हैं। मगर जमीनी हालात उनकी बातों से मेल नहीं खाते।
