दिल्ली बम विस्फोट से दहल गई है। प्रधानमंत्री मोदी ऐतिहासिक लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हैं और आतंकवाद के खात्मे का वादा करते हैं और आतंकवादियों ने उसी लाल किले के परिसर में बम विस्फोट कर दिया है। जिस समय दिल्ली बम विस्फोट से दहल रही थी, उसी समय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समेत पूरा मंत्रिमंडल बिहार चुनाव प्रचार में व्यस्त था। प्रधानमंत्री तो भूटान भी पहुंच गए। भूटान से उन्होंने चेतावनी दी, ‘किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।’ विस्फोट में अब तक बारह लोग मारे जा चुके हैं। पच्चीस नागरिक घायल हुए हैं। दिल्ली की सड़कों पर लोग कीड़े-मकोड़ों की तरह मारे जा रहे हैं और सरकार बिहार चुनाव में मशगूल है। आतंकवाद वैश्विक चिंता का विषय है। भारत में यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। हर आतंकवादी हमले का राजनीतिकरण करना, हर हमले का प्रचार में इस्तेमाल करना और हिंदुओं व मुसलमानों के बीच दरार पैदा कर राजनीतिक रोटियां सेंकने का उद्योग पिछले दस सालों से चल रहा है। अगर देश की राजधानी सुरक्षित नहीं है, तो इस देश में क्या सुरक्षित है? जम्मू-कश्मीर में भारतीय पर्यटक सुरक्षित नहीं हैं। मणिपुर जैसे राज्यों में जनता सुरक्षित नहीं है। राजधानी दिल्ली में कभी भी, कहीं भी बम धमाका हो सकता है। पहलगाम में घुसकर आतंकवादी २६ पर्यटकों की हत्या कर महिलाओं का सिंदूर पोंछ करके चले गए, लेकिन गृह मंत्रालय को उनका कोई सुराग नहीं मिला। यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय गृह मंत्रालय का ‘इंटेलिजेंस’ तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है। इतना बड़ा हमला हो जाता है और खुफिया एजेंसियों को पता तक नहीं लगता? खुफिया एजेंसी का राजनीतिकरण हो गया है। आतंकवादियों को पकड़ने के बजाय, यह तंत्र राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बैल की तरह जोत दिया गया है। पहलगाम हमले के गुनहगार अभी तक नहीं मिले हैं। पुलवामा के गुनहगार आजाद हैं। अब दिल्ली के गुनहगार भाग गए हैं। सरकार हाथ मल रही है। भारत सरकार
अपने ही नागरिकों की मौत
खुली आंखों से देख रही है। पहलगाम हमले के बाद, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया। ‘अब हम पाकिस्तान पर तिरंगा फहराकर लौटेंगे। हम पाकिस्तान का ऐसा हाल कर देंगे कि वो दोबारा उठ नहीं पाएगा,’ ऐसी ही गर्जना उस समय हुक्मरानों ने की थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के कारोबार बंद करने की धमकी देते ही ‘सिंदूर’ लपेट दिया गया। इसके बाद भारत सरकार ने घोषणा की, ‘Any future terror act will be considered act of war against India’ यानी, भारत पर भविष्य में होनेवाले किसी भी आतंकी हमले को युद्ध कार्रवाई माना जाएगा। अगर यह सच है तो क्या मोदी सरकार सोमवार को दिल्ली के लाल किले पर हुए आतंकी हमले को भारत के खिलाफ युद्ध मानेगी? इस हमले में दस निर्दोष लोग मारे गए। इस हमले को किसने अंजाम दिया, इसकी तलाश अभी जारी है। अपनी तलाश अपने पास रखो। पहले आतंकियों और उनके पाकिस्तानी बाप-दादाओं का सफाया करो। दिल्ली ब्लास्ट से पहले तीन राज्यों में पुलिस कार्रवाई में २,९०० किलो विस्फोटक बरामद हुआ था। अगर आतंकी संगठनों से जुड़े आठ-दस लोग गिरफ्तार भी हो जाते तो भी दिल्ली में धमाका होना था वो हो ही गया। अब मुंबई समेत बड़े शहरों को अलर्ट पर रहने का आदेश दिया गया है। गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर एक ही दिन में लाखों-करोड़ों की ड्रग्स जब्त की जाती है। इन सबका कनेक्शन पाकिस्तान और अफगानिस्तान से होने का राजफाश होता है। अमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भर रहा एयर इंडिया का एक विमान दो सेकंड में क्रैश हो जाता है। ये हादसा था या साजिश, ये अभी रहस्य बना हुआ है। मोदी और शाह की हत्या की साजिशें समय-समय पर नाकाम??? होती रहती हैं, लेकिन ये सभी लोग अभेद्य सुरक्षा के पिंजरे में बैठे हैं और देश के नागरिक सड़कों पर, सार्वजनिक स्थानों पर
डर के साये में
जैसे-तैसे से जी रहे हैं। जब दिल्ली में लाल किले के पास भीड़भाड़ वाले चांदनी चौक में विस्फोट होता है तो कम से कम सौ लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी संवेदना आदि व्यक्त की। गृह मंत्री ने स्थिति की समीक्षा की, लेकिन निर्दोष लोगों की जान बचाना आपकी ही जिम्मेदारी थी। आप बिहार की राजनीति में दांव-पेच में व्यस्त थे और आतंकवादी भारत में घुस आए। श्री शाह बार-बार कहते हैं कि हम सभी आतंकवादियों का सफाया कर देंगे। उनकी नजर में, विपक्षी दलों के नेता आतंकवादी हैं और वर्तमान में सुरक्षा बलों का इस्तेमाल उनका बंदोबस्त करने के लिए किया जा रहा है। दिल्ली में सोमवार को हुए विस्फोट का इस्तेमाल मंगलवार को बिहार के मतदान के अंतिम चरण के लिए किया गया। हो-हल्ला मचाया गया कि देश पर आतंकवादी हमला हुआ है, लेकिन इस आतंकवादी हमले के लिए खुद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। वे देश नहीं संभाल पा रहे हैं। उन्हें कानून-व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। खुद को सरदार पटेल के रूप में देखने वाले अमित शाह अब तक के सबसे कमजोर और सबसे बेकार गृह मंत्री हैं। उनकी आंखों के सामने २६ महिलाओं के सिंदूर मिटाए जा रहे हैं, उनकी नाक के नीचे विस्फोट किया जा रहा है और गृह मंत्री अपना पंचरंगी शॉल कंधे पर रखकर बैठक कर रहे हैं। दिल्ली बम धमाकों ने देश के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोदी-शाह सरकार आतंकवाद का सफाया करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने में विफल रही है। अगर वह इस्तीफा दे देते हैं तो यह १४० करोड़ लोगों पर उपकार होगा, वरना दिल्ली, मुंबई और बंगलुरु जैसे शहर खून से लथपथ नजर आएंगे। भाजपाइयों, अगर आप भारत माता के सच्चे भक्त हैं तो गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांगिए। यही राष्ट्र सेवा होगी!
