मुख्यपृष्ठस्तंभअवधी व्यंग्य : चुनावी चकल्लस

अवधी व्यंग्य : चुनावी चकल्लस

एड. राजीव मिश्र मुंबई
देश मा जब से चुनाव के घोषणा भई है तब से गली-गली में नेतन के भरमार होइ गई है। चुनाव के मौसम अउतय बड़का नेता, छोटका नेता, बड़का चमचा, छोटका चमचा, बैनरबाज, पम्पलेटबाज, पोस्टरबाज अउर के ढेर सारी वैकेंसी निकरत है। सब अपनी औकात के हिसाब से कुर्ता-पैजामा सियाय के टाइट हैं। केउ बर्तमान बिधायक के तो केउ भावी बिधायक के पाला में ताल ठोकि रहें हैं। सबके दैनिक पैकेज के भी घोषणा होइ गा अहइ। जे बर्तमान बिधायक हैं उ अपने कार्यकाल मा मोटा पइसा कमाए हैं, जौनि वजह से उनकर रेट सबसे हाई है। सुबह के चाय, नाश्ता, दुपहर के खाना, संझा के चाय, रात के खाना के साथ रोज के पाँच सौ रुपिया के बेवस्था अहइ। जे भावी बिधायक हैं उनका पैकेज थोड़ा कम अहइ पर उ रात के खाना के पहिले एक-एक क्वार्टर दारू के ब्यवस्था कीन्ह हैं।
गाँव के जेतना ठेलुआ रहें सब काम पे लागि गये हैं। सबके ट्रेनिंग शुरू होइ गई है। बिकास के आकाश देखावइ के साथ-साथ विरोधी पार्टी के पोस्टमार्टम तक के विधिवत ट्रेनिंग चलि रही है। शेरो-शायरी विंग भी काम पे लागि गई है। नारा तैयार करे में शायरन के बीच होड़ मची है। सबसे पहिले बर्तमान बिधायक के नारा तैयार भवा। गली-गली में शोर बा, बिधायक हमरा शेर बा। एक दुइ तीन चार, भइया जी की जय-जय कार। काहें परे हौ चक्कर मा, केऊ नाय बा टक्कर मा। नारा नही इशारा बा, अब इतिहास हमारा बा…। ओहर भावी बिधायक के कबी लोग अलगइ आतंक मचाये हैं। एक दुइ तीन चार… अबकी घुरहू के सरकार। हारि गएँ परधानी में… गइल भइसियां पानी में। बा जनता के इहै पुकार… भइया के होई सरकार।
सब चमचन के रोजगार उफान पे है, केउ केहू से तनिकउ दबे के तैयार नही हैं। इही बीच एक दिन दूनउ दल के रैली आमने-सामने आइ गई। नारा के आँधी लात-मुक्का के कब तूफान होइ गवा पतय नही चला। दस मिनट बाद लगभग तीस-चालीस चेला कुर्ता-पैजामा शहीद करवाये जमीन पे पड़े कराह रहे हैं और उधर दूसरे दिन से दूनउ पक्ष में नई भर्ती चालू होइ गई।

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