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पड़ताल : गुटबाजी और सत्ता संघर्ष… कुंभ मेले की तैयारी के रंग में भंग… मंत्री-आयुक्त तालमेल की चुनौती

सुनील ओसवाल

कुंभ मेले की तैयारियों में प्रशासनिक अधिकारी स्पष्ट गुटों में बंटे, मुख्यमंत्री के करीबी और मंत्री समर्थक अलग-अलग गुटों में। अधिकारों का उलझा जाल और तटस्थ अधिकारी तैयारी में सबसे बड़ी बाधा बने।
आगामी कुंभ मेले की तैयारियों में प्रशासनिक अधिकारियों के बीच छुपे हुए गुट और सत्ता संघर्ष ने चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी अधिकारी और मंत्री गिरीश महाजन के समर्थक प्राधिकरण के भीतर अलग-अलग गुटों में बंटे हुए हैं। इस गुटबंदी का असर सीधे कुंभमेले की योजनाओं और कार्रवाई पर पड़ रहा है।
कुंभ मेला प्राधिकरण बनने के बाद भी, कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और अन्य संस्थाओं के अधिकारी समान दर्जे पर होने की वजह से निर्णय प्रक्रिया जटिल हो गई है। विभागीय आयुक्त और प्राधिकरण के अध्यक्ष अब ज्यादातर मामलों में तटस्थ बने हुए हैं।
निविदा और गुणवत्ता नियंत्रण में खामियां
– डॉ. प्रवीण गेडाम ने महापालिका काल में त्रयस्थ यंत्रणा के जरिए गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था बनाई थी, जिसमें इंजीनियरिंग कॉलेज भी शामिल थे।
– अब यह सारी जिम्मेदारी प्राधिकरण के आयुक्तों के पास है।
– विभिन्न विभागों ने लिखित आदेश और निविदा प्रक्रियाओं की अनदेखी कर प्रशासनिक कमी को उजागर किया है।
मंत्री स्तर पर समन्वय ही एकमात्र रास्ता
कुंभ मेले को सफल बनाने के लिए अब केवल मंत्री स्तरीय समन्वय ही विकल्प बचता है। अधिकारी गुटबंदी और अधिकारों के अस्पष्ट वितरण ने प्रशासनिक तालमेल को कमजोर कर दिया है।
प्राधिकरण बनने के बावजूद, कुंभ मेले की तैयारी में अधिकारियों के गुट और संस्थागत जटिलताएं अब सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। कुंभमेले की सफलता अब सीधे तौर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति और मंत्री-प्रशासन तालमेल पर निर्भर करेगी।

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