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पड़ताल : यात्रियों की जान रामभरोसे! … सीएसएमटी स्टेशन पर मेडिकल सुविधा ठप

– मौत, बीमारी और जिम्मेदारी सब किसके भरोसे
– प्रधानमंत्री की जेनेरिक दवा योजना पर ताला

जेदवी

एशिया के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में गिना जाने वाला सीएसएमटी (छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस), जहां रोजाना लगभग ३० लाख यात्री आते–जाते हैं, वहां इस समय एक भी मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं है।
प्रधानमंत्री द्वारा देशभर के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर १८ सस्ती जेनेरिक दवाओं वाले जन औषधि केंद्रों का उद्घाटन किया गया था। इन्हीं में से एक केंद्र सीएसएमटी पर खोला गया था, लेकिन यह सुविधा सिर्फ एक साल में ही बंद हो गई। अब हालात ऐसे हैं कि दवाई के लिए यात्री स्टेशन पर भटकते फिर रहे हैं।
एक साल में ही ‘दम’ तोड़ गई प्रधानमंत्री की योजना
नवंबर २०२४ में देशभर में १८ जन औषधि केंद्रों का उद्घाटन हुआ था। उसी योजना के तहत सीएसएमटी पर भी जेनेरिक मेडिकल शॉप शुरू की गई थी, लेकिन अब वह बंद पड़ी है। लाखों यात्रियों वाले इस स्टेशन पर दवाई ढूंढ़ना आज एक खजाना ढूंढ़ने जैसा हो गया है।
१९ नवंबर की घटना, न मेडिकल, न मदद
मुंबई से बीदर जा रही ट्रेन संख्या २२१४३ में सफर कर रहे यात्री बबन्ना कुसालकर की अचानक तबीयत खराब हो गई। दवा की तलाश में स्टेशन पर उतरे तो पता चला, ‘पूरे स्टेशन पर एक भी मेडिकल स्टोर खुला नहीं है।’ किसी सुरक्षाकर्मी को नहीं पता कि मेडिकल कब बंद हुआ।
किसी अधिकारी को नहीं पता कि इसकी जिम्मेदारी किसकी है और यात्री… बस पूछते और भागते रह गए।
१ घंटा इंतजार
बबन्ना कुसालकर मदद की उम्मीद में स्टेशन मास्टर के ऑफिस पहुंचे, लेकिन बताया गया, ‘स्टेशन मास्टर उपलब्ध नहीं हैं।’ पूरा एक घंटा इंतजार करने के बावजूद कोई जवाब, कोई मदद और कोई समाधान नहीं मिला। जब यात्री जीआरपी थाने पहुंचे तो वहां से जवाब मिला, ‘यह शिकायत हमारे दायरे में नहीं आती।’
बड़ा सवाल – लाखों यात्रियों वाला स्टेशन और… शून्य मेडिकल सुविधा?
रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल निला ने दावा किया, ‘प्लेटफॉर्म नंबर ८ पर जन औषधि मेडिकल स्टोर मौजूद है। प्लेटफॉर्म नंबर १ पर कभी मेडिकल था ही नहीं। इसके अलावा एंंबुलेंस सुविधा उपलब्ध है।’ लेकिन जब सामना संवाददाता ने मौके पर जांच की तो सुरक्षाकर्मियों को मेडिकल स्टोर बंद होने की तारीख तक पता नहीं था। जनरल स्टोर वाले ने बताया, ‘दो महीने से दुकान बंद है, शायद टेंडर खत्म हुआ है।’ यात्रियों को दवाई खरीदने के लिए स्टेशन से बाहर जाना पड़ रहा है, यानी रेलवे के दावे और असलियत में जमीन-आसमान का फर्क है।
स्टेशन मास्टर की दलील
‘हमारे पास बेसिक उपचार की सुविधा है- जैसे सर्दी, बुखार, उल्टी आदि की दवाएं…’ लेकिन जब स्टेशन मास्टर मिल ही नहीं रहे, तो ये सुविधा किसे मिलेगा। यह सवाल अब भी बाकी है।
प्रधानमंत्री के हवाई दावे सरकार ने दावा किया था कि जेनेरिक दवाएं ५०–९० प्रतिशत तक सस्ती हैं और १,८००+ दवाइयां उपलब्ध हैं। गरीब और आम यात्रियों को सस्ती दवा देने के लिए स्टेशनों पर ये मेडिकल खोले गए थे। लेकिन असलियत ये है, ‘योजनाएं शुरू होती हैं, तस्वीरें खिंचती हैं…और फिर ताला लग जाता है।
अंतिम सवाल
सीएसएमटी जैसे स्टेशन पर जब एक भी मेडिकल सुविधा नहीं है तो बाकी स्टेशनों की क्या हालत होगी?
यात्रियों की, जान की जिम्मेदारी किसकी है
रेलवे की सरकार की या फिर किस्मत की?
सीएसएमटी को सिर्फ दवा नहीं, प्रशासनिक जागरूकता की जरूरत है, नहीं तो अगली बार किसी यात्री की जान जाएगी और जवाब होगा, ‘शिकायत हमारे दायरे में नहीं आती।’

यात्रियों की मांग
सीएसएमटी पर तुरंत २४×७ मेडिकल स्टोर शुरू किया जाए।
स्टेशन पर आपातकालीन मेडिकल कियोस्क लगाए जाएं।
स्टेशन मास्टर और जीआरपी की जवाबदेही तय हो।
मेडिकल सुविधा को रेलवे एक्ट के तहत अनिवार्य किया जाए।
रेलवे प्रशासन की सफाई, ‘मेडिकल है, बस किसी को दिख नहीं रहा।’

स्थिति विवरण
प्लेटफॉर्म १८
प्रतिदिन यात्री ३० लाख
प्रतिदिन ट्रेनें १,०००
लंबी दूरी की ट्रेनें ५७+
उपलब्ध मेडिकल सुविधा शून्य

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