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संपादकीय : दिलकश ‘ही-मैन’ …अलविदा धरमजी!

हिंदी सिनेमा के सबसे खूबसूरत, हैंडसम और नेक नायक धर्मेंद्र यानी ​​धरमपाजी। पिछले छह दशकों से हिंदी सिनेमा के सिल्वर स्क्रीन पर राज करनेवाले इस हैंडसम अभिनेता ने सिल्वर स्क्रीन को अलविदा कह दिया है। सत्तर के दशक में न केवल युवतियों बल्कि युवकों के भी आकर्षण का केंद्र रहे धर्मेंद्र से लेकर एक के बाद एक भूमिका निभानेवाले धरमजी या धीरूपाजी तक, फिल्म उद्योग में उनका सफर असाधारण रहा। पिछले कई दिनों से धरमजी की तबीयत नरम-गरम थी। भले ही उम्र हो गई थी, उनका शरीर थका हुआ था, लेकिन धाकड़ और दिल से नौजवान धर्म जी के आस-पास किसी भी रोग या व्याधि को फटकने की क्या हिम्मत थी! यह ‘ही-मैन’ अब दुनिया को अलविदा कह गया तो केवल बढ़ती उम्र के कारण। धर्मेंद्र ने न केवल अपने फिल्मी करियर, बल्कि अपने पूरे जीवन का आनंद लेने के बावजूद अपने स्वास्थ्य को अच्छी तरह से बनाए रखा था। उम्र के नब्बे साल के पड़ाव में भी धरमजी में एक स्वस्थ शरीर और अपार ऊर्जा के साथ उत्साही मन का अद्भुत संयोजन था। धरमजी ने न केवल एक शरारती अभिनेता, एक रोमांटिक नायक और पर्दे पर एक युवा आकर्षण की छवि को मूर्त रूप दिया, लेकिन इस नटखट जवानी को उन्होंने निजी जीवन में और बाद के वर्षों में भी साथ रखा। बुढ़ापे की निशानियों को मात देते हुए और अपनी नायकत्व को मस्तीभरे अंदाज में दर्शाते हुए वे हमेशा एक ‘हीरो’ की तरह जीते रहे! सिनेमा के बाद वे अक्सर ‘रियलिटी शो’ के मौकों पर छोटे पर्दे पर नजर आते थे, लेकिन उसी आकर्षक, राजसी अंदाज में। कभी फुल साइज जींस की शर्ट के सारे बटन खुले छोड़े हुए, कभी अपनी मजबूत और मांसल भुजाओं को दिखाते स्लीवलेस जैकेट, कभी हॉलीवुड फिल्मों में ‘काउबॉय’ जैसी लैदर हैट, ऐसे प्रामाणिक मर्दाना पहनावे उनकी विशेषताएं रहीं। सिनेमा के साथ-साथ वे असल जिंदगी में भी अपने हैंडसम ‘लुक’ का खास ख्याल रखते थे। धर्मेंद्र का समग्र व्यक्तित्व, उनकी स्टाइल और दमदार संवाद बोलने का बेहतरीन अंदाज ने
सिनेमा प्रेमियों को मोहित
कर डाला था। फिल्म निर्माता और निर्देशक भी धर्मेंद्र के आकर्षण और रोमांटिक हीरो से लगातार प्रभावित रहते थे। एक फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर सफल या सुपरहिट बनाने के लिए एक हीरो या अभिनेता में जो भी आकर्षण होना चाहिए, वह सब मसाला धर्मेंद्र में भर-भरकर मौजूद था। यही कारण है कि शुरुआती संघर्ष के दौर को छोड़कर, धर्मेंद्र को कभी भी ‘बुरा दौर’, भूमिकाओं का अकाल या काम की कमी नहीं झेलनी पड़ी। उनका जिंदादिल व्यक्तित्व, खुले दिल और खुले विचारों वाला स्वभाव, साथ ही बोली में उर्दू, पंजाबी और हिंदी के मिश्रण से सबका दिल जीत लेने की उनकी क्षमता असाधारण थी। अपने पूरे फिल्मी करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दीं। ‘शोले’ में उनके ‘वीरू’ का किरदार को क्या कोई भूल सकता है? जब खलनायक गब्बर (अमजद खान) बसंती उर्फ ​​हेमा मालिनी से नाचने के लिए कहता है, तो जंजीरों से जकड़े धर्मेंद्र का मशहूर अजर-अमर डायलॉग ‘कुत्ते… कमीने, मैं तेरा खून पी जाऊंगा’ और उतना ही जोशीला डायलॉग ‘बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना’, पैंâस के जेहन में हमेशा के लिए बस गया। ‘शोले’ में ‘बसंती’ को पिस्तौल से पेड़ से आम तोड़ने की ट्रेनिंग देते हुए धर्मेंद्र ने जो रोमांटिक शरारतें कीं, वो कमाल की थीं। ये सीन और बसंती के प्यार और स्वीकृति पाने के लिए नशे में पानी की टंकी पर चढ़नेवाला ‘वीरू’, ये सब बॉलीवुड की अनमोल धरोहर है। डायलॉग डिलिवरी धर्मेंद्र की खासियत थी और इस अभिनेता ने उन्हें मिले हर रोल और डायलॉग का भरपूर इस्तेमाल किया। ‘शोले’ के साथ-साथ ‘सत्यकाम’, ‘चरस’, ‘प्रतिज्ञा’, ‘धरम-वीर’, ‘शराफत’, ‘अनपढ़’, ‘यकीन’ उनकी मशहूर फिल्मों की लंबी फेहरिस्त है। सुपरहिट फिल्म ‘फूल और पत्थर’ ने धर्मेंद्र को
‘सुपरस्टार’
बना दिया। हर लिहाज से कामयाब रही इस फिल्म में धर्मेंद्र पहली बार शर्टलेस हीरो के तौर पर नजर आए और इसी रोल ने उन्हें ‘ही-मैन’ की पहचान दिलाई। धर्मेंद्र ने न सिर्फ एक्शन फिल्मों में अपनी पहचान बनाई, बल्कि उन्होंने रोमांटिक फिल्मों में भी लंबे समय तक रोमांटिक हीरो के तौर पर राज किया। साठ के दशक में आई अपनी पहली फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ में धर्मेंद्र ने कुमकुम के साथ रोमांटिक रोल निभाया था। इसके बाद १९७० में उन्होंने हेमा मालिनी के साथ हिट कॉमेडी फिल्म ‘तुम हसीन मैं जवां’ की। मुमताज के साथ ‘लोफर’ जबरदस्त हिट रही। १९७७ में हेमा मालिनी के साथ ‘ड्रीम गर्ल’ से वह लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गए। फिल्म ‘मेरा गांव मेरा देश’ में उनका ‘एक्शन’ और ‘इमोशन’ का खूबसूरत संगम दिखा और ‘सीता और गीता’ में हेमा मालिनी के साथ निभाई भूमिका के चलते इस मजेदार और दिलकश हीरो ने सिनेमा प्रेमियों के दिलों पर कब्जा कर लिया। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की फिल्में एक के बाद एक सुपरहिट होने लगीं। इस दौरान धर्मेंद्र-हेमा की ‘ऑन-स्क्रीन’ और ‘ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री’ रंग लाने लगी। धर्मेंद्र और हेमा एक समीकरण ही बन गए। शादीशुदा धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी के साथ अपनी जिंदगी शुरू की, लेकिन वे कभी दूर नहीं हुए। उन्होंने अपने मूल परिवार के साथ अपने रिश्ते को कभी टूटने नहीं दिया। उन्होंने एक खूबसूरत संतुलन बनाकर दोनों ही दुनिया को बखूबी संभाला। सिनेमा की मायावी दुनिया में बेहद कामयाब होने के बावजूद, धर्मेंद्र हमेशा जमीन पर रहे। ‘लोगों ने मुझे हीरो बनाया, लेकिन मैं तो बस इंसान बनना चाहता हूं,’ धर्मेंद्र कहते थे। धर्मेंद्र ने फिल्मों और फिल्मी भूमिकाओं की चमक-दमक से दूर रहकर अपनी एक अलग दुनिया बसा ली थी। ‘बॉलीवुड’ के इतिहास पर अमिट छाप छोड़नेवाला यह दिल को छू लेने वाला और अनोखा हीरो भले ही अब रुपहले पर्दे से विदा हो चुका हो, लेकिन यह दिलकश रोमांटिक ‘ही-मैन’ हमेशा लोगों के दिलों में बसा रहेगा। अलविदा धरमजी!

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