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‘आयातित’ को टिकट देने से भाजपा में बढ़ा बाहरी-भीतरी का विवाद! …कहीं सामूहिक इस्तीफा, कहीं बगावत तो कहीं सड़क पर उतरे भाजपाई

सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति की एकजुटता केवल कागजों पर ही दिखाई दे रही है। वास्तव में महायुति के दलों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सबसे खराब हालत भाजपा की है। दो दिन पहले पार्टी में शामिल आयातित लोगों को टिकट देने से पार्टी में बाहरी और भीतरी का विवाद बढ़ता जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम न होने से स्थानीय निकायों के चुनावों में महायुति को जोरदार फटका लगने वाला है। इसका दूसरा पहलू यह है कि पार्टी के भीतर कहीं सामूहिक इस्तीफा, कहीं बगावत तो कहीं भाजपाई सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मनमाड में काफी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। ऐसी ही हालत कई अन्य जगहों की है।
सातारा जिले में कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है। वहां सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले और सांसद उदयनराजे भोसले ने आपसी सहमति का संदेश देकर एकता दिखाने की कोशिश की है, लेकिन दोनों गुटों के कई पुराने कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी भड़क उठी है। वर्षों की निष्ठा, चुनावों से लेकर सामाजिक उपक्रमों तक लगातार योगदान देने के बावजूद टिकट न मिलने का आरोप लगाते हुए कई कार्यकर्ता खुलकर बगावत पर उतर आए हैं। दोनों गुट के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ ही कई कार्यकर्ता निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरकर चुनाव में हलचल मचा रहे हैं। वहां कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम न होने से संगठनात्मक स्तर पर बड़ा तनाव पैदा हो गया है। भाजपा ने हाल ही में नए लोगों को शामिल कर उन्हें टिकट दिए। इस पैâसले ने पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी और बढ़ा दी है। कई जगह कार्यकर्ता पत्रकारों के सामने आरोप लगाते दिखे कि वर्षों से वे दोनों राजे का साथ देते आए, लेकिन समय आने पर उन्हें भुला दिया गया। इन निर्दलीय बागी उम्मीदवारों का प्रभाव चुनाव में साफ दिखाई देगा। इसी तरह कोल्हापुर में पार्टी के टिकट बंटवारे की नीति के प्रति भाजपाइयों की नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि उन्होंने सड़क पर उतरकर विरोध करने की चेतवानी दे दी है।

प्रतिष्ठा दांव पर
यहां स्थानीय नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। महायुति के भाजपा, दादा गुट और शिंदे गुट के बीच कई जगह सीधे मुकाबले देखने को मिल रहे हैं। गठबंधन होते हुए भी टिकट बंटवारे में नाराजगी और गुटबाजी बड़े पैमाने पर दिखाई दे रही है। इससे तय होने लगा है कि भाजपा की व्यापक चुनावी रणनीति जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम देगी। महायुति दलों के अलग-अलग गुट आमने-सामने हैं। इतना ही नहीं कई अन्य प्रमुख नपाओं में महायुति के ही घटक दल एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं।

‘गिरवी रख दी हमारी पार्टी!’
भाजपा में बड़ी बगावत
नाराज ५० पदाधिकारियों का
मनमाड में सामूहिक इस्तीफा

महायुति में एक बार फिर भूचाल आ गया है, जिसने अंदरखाने चल रहे शक्ति संघर्ष को सार्वजनिक कर दिया है। यह आंतरिक कलह तब सामने आई जब नासिक जिले के मनमाड में भाजपा के भीतर बड़ीr बगावत हुई है। यहां भाजपा के लगभग ५० नाराज पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले नाराज भाजपाइयों ने खुलेआम आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी को जबरन शिंदे गुट के साथ गठबंधन करने पर मजबूर किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं की उपेक्षा हो रही है।
मनमाड की स्थानीय भाजपा इकाई की इस बगावत का तात्कालिक कारण स्थानीय निकायों के चुनावों में सीट बंटवारे में हुआ भारी अन्याय है। सूत्रों के अनुसार, वहां भाजपा को १५ से २० सीटें मिलने की उम्मीद थी, लेकिन शिंदे गुट के दबदबे के चलते पार्टी को सिर्फ चार सीटें देकर निपटा दिया गया। नगराध्यक्ष पद का उम्मीदवार भी शिंदे गुट का ही है। इससे नाराज भाजपाइयों ने दो टूक कहा है कि पार्टी को शिंदे गुट के खूंटे से बांधकर रखा गया है। पूर्व अध्यक्ष सचिन संघवी ने मीडिया से बातचीत में पार्टी नेतृत्व पर करारा हमला बोला और आरोप लगाया कि हमारी पार्टी को गिरवी रख दिया गया है। विवाद तब और गहरा गया जब नगराध्यक्ष पद के दावेदार रहे भाजपा के गणेश धात्रक को पार्टी ने एबी फॉर्म तक नहीं दिया। धात्रक ने मजबूरी में शिंदे गुट के आगे सरेंडर किया और अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। धात्रक के कई समर्थक इस अपमान से नाराज होकर दादा गुट के समीर भुजबल के साथ चले गए, जो गठबंधन के लिए एक और बड़ा झटका है। इस्तीफा देने वाले नेताओं ने न केवल मौजूदा समझौते पर, बल्कि पिछले २५ वर्षों से मनमाड नगर परिषद में भाजपा का एक भी नगरसेवक न चुनकर ला सकने वाली स्थानीय नेतृत्व की विफलता पर भी कड़ी नाराजगी जताई है।

 

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