प्रभुनाथ शुक्ल भदोही
शादी के रिश्ता जुड़तिए आम से लेके खास सबके दिल में कुछ-कुछ होखे लागेला। ई एह तरह के अनुभव बा जेकरा के शादीशुदा आदमी ठीक से बता ही ना पावत। काहें कि ई फीलिंग बस शादी के पहिले तक रहेला। शादी होते ही आदमी त बीबी के संभाले में अइसन बिजी हो जाला कि ओकरा लगे ई अनुभव के राखे का टाइमे ना बचेला। बीबी के संभालल मतलब खुला मैदान में जंग लड़ल बाष्ठ सावधानी हटल कि दुर्घटना घटल। बेचारा मरद, बीबी के देखत-देखत इत्ती थक जाला कि खुदे के संभालल मुश्किल हो जाला। अब अइसन हालत में उ शादी के पहिलहा वाला अनुभव का बताई?
अब त घर में बधू प्रवेश होतहीं एकदम चुपचाप घर के अंदरूनी गृहयुद्ध शुरू हो जाला। तबे जाके समझ में आवेला कि शादी के लड्डू वाला बात कइसे सच बा, जे खाई उ पछताई, आ जे ना खाई उ तड़पाई। अबकी शादियन त शादी ना, पूरा शाही कार्यक्रम हो गइल बा। पहिले जहां शादी के मतलब सादगी, आदर-सम्मान रहल अब ओहिजा रोशनी, डीजे, फोटो शूट आ सोशल मीडिया लाइव हो गईल बा। जब तक कन्वेयर बेल्ट जैसा बारात ना निकल जाव, दूल्हा-दुल्हन के घरवाला के सासें अटकल रहेला, ठीक ऊहे तरह जइसन पड़ोसिये देशा के डर लागेला कि कब मिसाइल अटैक हो जाई।
ऊपर से रिश्तेदार लोगष्ठ फूफा-बुआ, जीजा-साला, सबके अपना-अपना नखरा। खाना थोड़ा कम मसाले वाला हो गइल त लोग राबिनहुड बन के शिकायत उठा देत बा। अब दूल्हा अपनी शादी देखी कि फूफा जी के मनुहार? बाकि आजकल त असली आफत एके चीज बा जूता चोरी। जूता चोरी के रस्म दूल्हा आ ओकरा घर वाला के नींद ले उड़ा देले बा। दूल्हा के त शादी से पहिले ही जूता छुपाई खातिर अलग बजट बनावे के पड़ेला। काहें कि सालियन के मिजाज पता ना कब जीजा जी के औकात बतावे लग जइहें।
अब सालियिन लोग त पूरा गैंग बना लेले दिल त चुरावेलें, जेब त छान देवेलें, आ ऊपर से जूता मिलत तब जब बोलियां पूरा हो जाई। …जूता दो पैसा लो, पैसा दो जूता लो… ‘हम आपके हैं कौन’ वाला गाना त सीधा दूल्हा पर टूटे वाला बिजली बन गइल बा। कई बेर त ई जूता के दाम अतना भारी पड़ जाला कि बारात बैरंग लौटे के नौबत आ जाला। दूल्हा बेचारा कहे भी का दुल्हन ले जाए के बा त सालियन के फरमान मानहीं पड़ेगा।
