आदित्य जैन
ठाणे मध्यवर्ती कारागृह का नाम आते ही जेहन में हथकड़ियां, ताले और सजा की तस्वीर उभरती है। लेकिन इसी जेल की कुछ बैरकों में अब एक अलग ही आवाज सुनाई देती है-किताबों के पन्ने पलटने की, सवाल पूछने की और नए भविष्य की कल्पना करने की।
चुनौती!
वर्ष २०२४–२५ में ठाणे जेल के १५७ कैदियों ने पढ़ाई और व्यावसायिक प्रशिक्षण का रास्ता चुना। यह कोई मामूली आंकड़ा नहीं। यह उस सोच को चुनौती है, जो जेल को केवल दंड का अड्डा मानती आई है। सवाल यह नहीं कि जेल में पढ़ाई हो रही है-सवाल यह है कि क्या हम सचमुच सुधार चाहते हैं या यह भी एक सरकारी प्रयोग बनकर रह जाएगा?
इन १५७ में से ७० कैदी स्नातक पाठ्यक्रमों में हैं। बीए और बीकॉम वही डिग्रियां, जिनके लिए बाहर लाखों युवा संघर्ष करते हैं। बीए प्रथम वर्ष में ३८, द्वितीय वर्ष में ३२। बीकॉम प्रथम वर्ष में ३४ और द्वितीय वर्ष में ३३ कैदी। बाकी ८७ कैदी रोजगारोन्मुख कोर्स कर रहे हैं-डिजिटल फोटोग्राफी, वीडियो प्रोडक्शन, वॉटर मैनेजमेंट, कृषि सहायक, सॉफ्ट स्किल्स। यानी अपराध के अतीत से बाहर निकलने की एक ठोस कोशिश। यह पढ़ाई यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विद्यापीठ के माध्यम से कराई जा रही है। जेल के भीतर मान्य शिक्षा, परीक्षा और प्रमाणपत्र-कागजों में नहीं, जमीन पर।
आत्मविश्वास
जेल प्रशासन का मानना है-जो कैदी पढ़ाई से जुड़े हैं, उनमें अनुशासन बढ़ा है। झगड़े कम हुए हैं। आत्मविश्वास लौटा है। कई कैदी पहली बार यह सोच पा रहे हैं कि जेल के बाद भी जिंदगी हो सकती है-इज्जत के साथ। लेकिन यहीं से असली फोकस शुरू होता है। अगर शिक्षा इतनी असरदार है, तो यह सुविधा महाराष्ट्र की हर जेल में क्यों नहीं? क्यों ठाणे जैसे कुछ कारागृह ही ‘मॉडल’ बनते हैं और बाकी जेलें उसी पुरानी सजा-केंद्र की सोच में अटकी रहती हैं? दूसरा और सबसे अहम सवाल-रिहाई के बाद क्या? डिग्री हाथ में है, हुनर सीखा है-लेकिन नौकरी कौन देगा? क्या सरकार के पास ऐसा कोई तंत्र है, जो जेल से छूटे कैदी को उद्योग, स्वरोजगार या अप्रेंटिसशिप से जोड़े? या फिर पढ़ा-लिखा कैदी भी बाहर आकर उसी सामाजिक दीवार से टकराएगा-जहां अपराध का ठप्पा सबसे भारी होता है? ठाणे जेल का यह प्रयोग बताता है कि अगर सरकार चाहे, तो जेल अपराध की फैक्ट्री नहीं, सुधार की प्रयोगशाला बन सकती है। लेकिन बिना नीति, बिना बजट और बिना रिहाई-पश्चात योजना के, यह प्रयोग भी एक अच्छी खबर बनकर अखबार के पन्नों में दब जाएगा।
