अमिताभ श्रीवास्तव
पाकिस्तानी मूल के ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने संन्यास ले लिया और अपनी टीम पर आरोप भी लगाए। जब तक खेलता और कमाता रहा तब तक सब सही था मगर जब टीम में वापसी नहीं हुई तो ख्वाजा की खुजली बढ़ गई और उसने अनाप-शनाप बकना शुरू कर दिया। सिडनी टेस्ट से पहले ख्वाजा ने खुलासा किया कि उन्हें अभी भी अपनी पृष्ठभूमि और नस्ल के कारण अनुचित आलोचना का सामना करना पड़ता है। जबकि इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी टेस्ट से पहले ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ ने उस्मान ख्वाजा की जमकर तारीफ करते हुए कहा था कि मैं उन्हें बहुत पहले से जानता हूं और वो जिस तरह से पुल शॉट खेलते थे, वैसा कोई नहीं खेल सकता। स्मिथ ने आगे कहा, ‘वो हमसे नफरत करता है कि उसे बाहर कर दिया गया, लेकिन उसे वापस जाकर खेलने के तरीके खोजने का मौका मिला। अगर वह खेलता रहता तो क्या वह ऐसा कर पाता, मुझे पक्का नहीं पता। लेकिन उन्होंने ख्वाजा की इस भावना के बारे में कुछ नहीं कहा कि उनके साथ अलग व्यवहार किया गया था। स्मिथ ने प्रेस कॉन्प्रâेंस में कहा, ‘मैच से एक दिन पहले गोल्फ खेलने के दौरान उनके घायल होने की जो बात हुई, वह अनुचित थी। मुझे लगता है कि उन्होंने १५ साल तक गोल्फ खेला है और उनका करियर काफी अच्छा रहा है। बाकी बातों पर मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। ये उस्मान के विचार हैं कि उसे नस्लवाद का शिकार होना पड़ा।
भूत भगाने के चक्कर में हत्या
अंधविश्वास केवल भारत की बात नहीं है, बल्कि विश्व में यह पैâला हुआ है। अब देखिए न, दक्षिणी चीन की एक अदालत ने एक महिला को कारावास की सजा सुनाई है, जिसने घर पर ‘भूत भगाने’ की रस्म निभाते समय अपनी बेटी को मार डाला था। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्वांगडोंग प्रांत के शेन्जेन की अदालत ने जुलाई में ली उपनाम वाली महिला को ३ साल के जेल की सजा सुनाई, जिसे ४ साल के लिए निलंबित कर दिया गया। उसकी बड़ी बेटी, जिसने अनुष्ठान में भाग लिया था, को भी यही सजा मिली। यह पैâसला लापरवाही से हत्या के आरोप में सुनाया गया था। अभियोजकों ने कहा कि ली और उसकी दोनों बेटियां टेलीपैथी और प्रेतबाधा से जुड़ी अंधविश्वासी धारणाओं से बुरी तरह प्रभावित हो गई थीं। उन्हें पूरा विश्वास था कि राक्षस उन पर हमला कर रहे हैं और उनकी ‘आत्माएं बेच दी गई हैं।’ पिछले साल दिसंबर में छोटी बेटी, जिसका उपनाम शी है, ने अचानक कहा कि उस पर प्रेतबाधा का साया है और उसने अपनी मां और बहन से उस पर झाड़-फूंक करने का अनुरोध किया। बस फिर शुरू हुआ अंधविश्वास का खेल और बेटी को ही मार डाला।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)
