सुनील ओसवाल / मुंबई
दादा गुट और भाजपा के बीच इन दिनों ‘वर्ड वॉर’ तेज हो गया है। पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका में कथित भ्रष्टाचार को लेकर उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के तीखे आरोपों से भाजपा में खलबली मच गई है। आरोपों पर सफाई देने के बजाय भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने चेतावनी भरे लहजे में बयान देकर राजनीतिक विवाद को और भड़का दिया है।
अजीत पवार ने आरोप लगाया था कि भाजपा ने बीते सात वर्षों में पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका को ‘लूटकर खाया’ है और सत्ता के बल पर भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने कभी उन पर ७० हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाए थे, वही आज सत्ता के लिए साथ बैठे हैं। इन आरोपों से असहज भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि अजीत पवार को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा ने आरोप-प्रत्यारोप शुरू किए तो अजीत पवार को परेशानी होगी। राजनीतिक हलकों में चव्हाण के इस बयान को भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान भटकाने और धमकी की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो भाजपा को धमकाने के बजाय तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए।
टकराव तेज
पिंपरी-चिंचवड चुनाव से पहले यह टकराव और तेज हो गया है, जहां एक ओर दादा गुट प्रशासनिक विफलता को मुद्दा बना रहा है, वहीं भाजपा आरोपों से बचने के लिए आक्रामक रुख अपनाती नजर आ रही है।
