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बीमार दिल बुधवार-गुरुवार को ही दे रहा धोखा! … दिल्ली एम्स की स्टडी में चौंकानेवाला खुलासा

– सप्ताह के दो दिनों में जा रही ज्यादा जानें
हफ्ते के दिनों में बुधवार और गुरुवार को सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकतर लोग मरने से कुछ समय पहले तक बिल्कुल स्वस्थ दिख रहे थे। उनकी मौत घर पर, सफर के दौरान या नींद में ही हो गई।

देश में युवाओं की अचानक मौत एक डरावनी सच्चाई बन गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हैं, जिनमें कोई नाचते हुए तो कोई जिम में वर्कआउट करते हुए गिर जा रहे हैं। लोग अक्सर इसे कोविड वैक्सीन या स्ट्रेस से जोड़कर देखते हैं। इसी रहस्य से पर्दा उठाने के लिए दिल्ली एम्स ने एक विस्तृत अध्ययन किया। इस स्टडी के नतीजे चौंकाने वाले हैं और बताते हैं कि आखिर क्यों फिट दिखने वाले युवा भी अचानक दम तोड़ रहे हैं। देश में अचानक होने वाली मौतों का कोई नेशनल डेटा उपलब्ध नहीं है। इसलिए एम्स के फॉरेंसिक और पैथोलॉजी विभाग ने मई २०२३ से अप्रैल २०२४ के बीच हुए २,२१४ पोस्टमार्टम का बारीकी से विश्लेषण किया। इस रिसर्च में केवल बाहरी जांच ही नहीं, बल्कि अंगों के सैंपल, माइक्रोस्कोपिक जांच और रेडियोलॉजिकल इमेजिंग का भी सहारा लिया गया। इस जांच में एक बेहद ही चौंकानेवाली बात सामने आई। इसमें बताया गया कि हफ्ते के दिनों में बुधवार और गुरुवार को सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गईं।
स्टडी के अनुसार, युवाओं में अचानक होने वाली ४२.६ प्रतिशत मौतों का कारण दिल की बीमारियां थीं। फॉरेंसिक जांच में पाया गया कि इन युवाओं की धमनियों में ७० प्रतिशत से ज्यादा ब्लॉकेज था। इसे `कोरोनरी आर्टरी डिजीज’ कहा जाता है। सबसे ज्यादा ब्लॉकेज `लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग आर्टरी’ में मिला, जिसे मेडिकल भाषा में जानलेवा माना जाता है। डराने वाली बात यह है कि इनमें से किसी को भी अपनी इस बीमारी का पहले से पता नहीं था। आंकड़ों के मुताबिक ५५ प्रतिशत मौतें घर पर हुईं, जबकि ३० प्रतिशत लोग सफर के दौरान अपनी जान गवां बैठे। जांच में १८० केस ऐसे मिले जो `सडन डेथ’ की परिभाषा में फिट बैठते थे। इनमें से ५७.२ प्रतिशत मौतें १८ से ४५ साल की उम्र के लोगों की थीं। मरने वालों में पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा थी।

किसी को हार्ट अटैक आए तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है तो उसे ज्यादा खाने-पीने से बचना चाहिए। एक आम गलतफहमी यह है कि कोई व्यक्ति खास तरीके से खांसकर हार्ट अटैक से बच सकता है, लेकिन ऐसा करने की कोशिश दिल की धड़कन के खिलाफ जा सकती है। व्यक्ति को खुद गाड़ी चलाकर हॉस्पिटल नहीं जाना चाहिए, क्योंकि वह बेहोश हो सकता है।

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