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स्कैम्स एंड स्कैंडल्स :  सुप्रीम कोर्ट ने निकाली हेकड़ी… सेंगर फिर से अंदर!

श्रीकिशोर शाही

गत सप्ताह सुप्रीम कोर्ट की गैलरी में एक अजब सी हलचल थी। कोर्ट रूम में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह के आते ही शांति पसर गई। सभी की निगाहें चीफ जस्टिस पर थीं कि देखें वे क्या फैसला सुनाते हैं। मामला था पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा के निलंबन का। एक नाबालिग के बलात्कार और उसके पिता की हत्या के आरोप में उसे उम्रकैद की सजा हुई थी और वह पिछले कई वर्षों से जेल में बंद है। पर अचानक दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी सजा को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद सियासी गलियों से लेकर आम आदमी के बीच गुस्से की लहर फैल गई।
जस्टिस सूर्यकांत ने कार्रवाई शुरू करते हुए कहा, ‘हम इस तथ्य से अवगत हैं कि जब किसी ट्रायल कोर्ट या हाई कोर्ट ने किसी दोषी या विचाराधीन अभियुक्त को जमानत पर रिहा किया हो तो आम तौर पर इस अदालत को उस व्यक्ति को सुने बिना ऐसे आदेश पर रोक नहीं लगानी चाहिए। लेकिन इस मामले में हालात अलग हैं, क्योंकि प्रतिवादी अभियुक्त को धारा ३०४-II के तहत भी सजा सुनाई गई है, जो महिला के पिता की गैर-इरादतन हत्या से जुड़ा मामला है और वह इस केस में हिरासत में है। मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हम उस आदेश पर रोक लगाते हैं। अभियुक्त को उस आदेश के आधार पर रिहा नहीं किया जाएगा।’ सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने आम जनता के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान और बढ़ा दिया।
मामला करीब सात-आठ साल पुराना है। उन्नाव का सराय माखी गांव। वहीं पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का परिवार मित्रवत रहता था। दोनों में काफी मेलजोल था। पीड़िता का चाचा, सेंगर का बॉडीगार्ड था और सेंगर के लिए मार कुटाई भी करता था। फिर किसी बात पर मामला बिगड़ा और दोस्ती-दुश्मनी में बदल गई। सेंगर के गुर्गों ने पीड़िता के घर में घुसकर उसके पिता की बुरी तरह से पिटाई की। नौबत केस, मुकदमा और मारपीट तक पहुंच गई। इसी दौरान सेंगर ने पीड़िता का रेप किया। कोई कहता है, वह दुश्मनी खत्म कराने गई थी तो कोई कहता है, उसे अगवा किया गया था। खैर, सेंगर लड़की को सामने पाकर बदले की आग में जल उठा और उसने कमरे का दरवाजा बंद कर उसके कपड़े नोचने शुरू कर दिए। चंद मिनटों में लड़की की अस्मत को उसने लूट लिया। पर खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। गांव में सेंगर के तीन गुर्गों ने लड़की को डरा-धमकाकर फिर से गेंगरेप को अंजाम दिया। लड़की के परिवार ने जब पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने की कोशिश की तो पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। पुलिस उसे समझाती रही कि विधायक दबंग है। उससे लड़कर तुम बर्बाद हो जाओगी। तब पीड़िता ने कोर्ट का रास्ता चुना। कोर्ट के आदेश के बाद मजबूरी में पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।
(शेष अगले अंक में)

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