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राजे की `मन की बात’,…बीजेपी में भूचाल… ‘कार्यकर्ता नहीं तो पार्टी मृत समान!’

-भाजपा की वर्कशॉप में छलका पूर्व सीएम का दर्द

-इशारों-इशारों में पीएम, एचएम पर साधा निशाना

सामना संवाददाता / नई दल्ली

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की एक कार्यशाला के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे का भावुक बयान सामने आया। उन्होंने कार्यकर्ताओं की भूमिका को पार्टी की रीढ़ बताते हुए कहा कि ‘कार्यकर्ता के बिना पार्टी प्राणविहीन होती है।’ उनके इस बयान को संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं की अनदेखी को लेकर चिंता के रूप में देखा जा रहा है। इसी के साथ ही यह कयास भी लगाए जा रहे हैं पूर्व सीएम ने मंच से खुलेआम इशारों-इशारों में ही सही, लेकिन पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने कहा कि पार्टी की सफलता का आधार जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता होते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नेतृत्व और संगठन को कार्यकर्ताओं की भावनाओं, मेहनत और सुझावों का सम्मान करना चाहिए। राजे ने कहा कि जब तक कार्यकर्ता संतुष्ट और सक्रिय नहीं होंगे, तब तक पार्टी का विस्तार और मजबूती संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की पहचान अनुशासन और कार्यकर्ता-आधारित राजनीति से रही है, जिसे बनाए रखना बेहद जरूरी है। उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक समीकरणों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। कार्यशाला में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वसुंधरा राजे की बातों का समर्थन करते हुए संगठन को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि कार्यकर्ता पार्टी का एंबेसेडर है और उसके साइन से काम होना चाहिए।
भाजपा में कुछ तो गड़बड़ है
विपक्षी दलों का कहना है कि यह बयान बीजेपी की अंदरूनी कलह और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का खुला सबूत है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कार्यकर्ताओं की अनदेखी सच में बढ़ गई है और क्या पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिस पार्टी में वरिष्ठ नेता ही कार्यकर्ताओं की अनदेखी की बात सार्वजनिक मंच से कहने को मजबूर हों, वहां संगठन की हालत खुद-ब-खुद समझी जा सकती है।
शेर के जरिए जताई संवेदना
अपने संबोधन में वसुंधरा राजे ने कार्यकर्ताओं के लिए एक शेर भी पढ़ा, जिसने माहौल को भावुक कर दिया, ‘किसी रोते हुए चेहरे से आंसू पूछ तो सही, किसी बेसहारा की लाठी बन तो सही। कहीं मत कर तलाश, इसी जमीं पर है ईश्वर, किसी के जख्म पर मरहम लगा तो सही।’

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