-लखनऊ में नेहा सिंह राठौर पर एक्शन, मामला हुआ दर्ज
-बेरोजगारों के मुद्दे उठाने पर यूपी पुलिस की कार्रवाई से मची हलचल
सामना संवाददाता / लखनऊ
लोकगायिका और सोशल एक्टिविस्ट नेहा सिंह राठौर पर हाल ही में एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और आलोचक दोनों ही सवाल उठा रहे हैं कि वे नेताओं और शक्तिशाली लोगों की आलोचना करती हैं तो गंभीर धाराओं में एफआईआर वैâसे दर्ज हो जाती है, जबकि अपराध के लिए उकसाने वाले नेता या हिंसा भड़काने वाले बयान देने वाले खुलेआम घूमते हैं।
दरअसल, शनिवार को नेहा सिंह राठौर हजरतगंज थाने पहुंची थीं। नेहा ने पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी की थी। इसी मामले में नेहा पर हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। पिछले साल २७ अप्रैल २०२५ को लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी को लेकर वे थाने पहुंची थीं। नेहा ने पहलगाम टेरर अटैक के बीच एक विवादित टिप्पणी की थी। नेहा सिंह राठौर की तरफ से इस केस में हुई एफआईआर को रद्द करने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की थी।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला
इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार केवल आलोचना और सवाल उठाने वालों को दबाने के लिए कानून का गलत इस्तेमाल कर रही है।
