– सनसनीखेज आरोप से सियासी गलियारों में घमासान
– टेंशन में आए निर्विरोध चुने गए प्रत्याशी
-जांच पूरी होने तक परिणाम पर लगी रोक
सुनील ओसवाल / मुंबई
छल-कपट के प्रयोग से से राज्य में जारी मनपा चुनावी प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध विजयी हुए हैं। विपक्ष ने इस मामले में चुनाव अयोग से शिकायत की है। दावा किया गया है कि नामांकन वापस लेने के लिए १०-१० करोड़ का ऑफर दिया गया। इससे सियासी गलियारों में घमासान मच गया है।
इस आरोप के बाद मजबूरी में ही सही, आयोग को एक्शन लेना पड़ा है। आयोग ने मामले की जांच रिपोर्ट आने तक निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों को विजयी घोषित करने पर रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद निर्विरोध उम्मीदवारों की जीत पर फिलहाल अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। राज्य की २९ नगर निगमों में चुनावी माहौल गरम है। नामांकन वापसी के अंतिम दिन राज्यभर में ६९ उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें सत्तारूढ़ भाजपा के ४४, शिंदे गुट के २२ दादा गुट के २ उम्मीदवार शामिल हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में निर्विरोध जीत के बाद विपक्ष ने आरोपों की झड़ी लगा दी। दावा किया गया कि नामांकन वापस लेने के लिए ५ से १० करोड़ रुपए तक का लेन-देन हुआ है। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने तत्काल दखल दिया है।
अंतिम फैसले पर निगाहें
आयोग के आदेशानुसार, यदि किसी वार्ड में चुनाव निर्विरोध होता है तो वहां के आयुक्त को विस्तृत जांच रिपोर्ट तुरंत आयोग को भेजनी होगी। आयोग की स्पष्ट मंजूरी मिलने के बाद ही परिणाम घोषित किए जा सकेंगे। इस फैसले ने सत्ताधारी खेमे में हलचल बढ़ा दी है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम बता रहा है। अब सबकी नजरें आयोग की जांच और अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
