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मनपा चुनाव में अकेले पड़े दादा…अपने भी छोड़ रहे हैं साथ…सियासी साख पर संकट

सामना संवाददाता / मुंबई

पिछले दो दिनों से भाजपा और अजीत पवार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा पर भ्रष्टाचारियों को शह देने का आरोप लगाने के बाद अजीत पवार को घेरने की रणनीति के तहत भाजपा ने उन्हें अलग-थलग करना शुरू कर दिया है। एक तरफ भाजपा जहां उन पर घोटाले के आरोपों को लेकर कार्रवाई का संकेत दे रही है, वहीं उन्हें हराने के लिए उनके ही कार्यकर्ताओं को दूर करने का दांव खेल रही है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड मनपा चुनाव में सत्ता हासिल करने के लिए उप मुख्यमंत्री अजीत पवार पूरी ताकत झोंकते नजर आ रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उनके अपने ही नेता उनका साथ छोड़ते दिख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की साजिश के वे शिकार होते नजर आ रहे हैं। उनकी पार्टी के स्थानीय दिग्गजों की निष्क्रियता और दलबदल ने दादा गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में अजीत पवार के लिए यह चुनाव अब प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। पार्टी अध्यक्ष द्वारा चुनाव को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाए जाने के बावजूद, चार बार नगरसेवक रह चुके अजीत गव्हाणे, जगदीश शेट्टी और निहाल पानसरे ने चुनावी मैदान में उतरने से साफ इनकार कर दिया। यह इनकार सिर्फ व्यक्तिगत पैâसला नहीं, बल्कि गुट के भीतर गहराते असंतोष का संकेत माना जा रहा है। स्थिति यहीं नहीं रुकी।
पूर्व महापौर मंगला कदम ने अपने पुत्र को भाजपा में भेज दिया और अब खुलकर उसका प्रचार कर रही हैं। पूर्व महापौर अपर्णा डोके और शकुंतला धराड़े ने ऐन मौके पर भाजपा से नामांकन दाखिल कर दादा को करारा झटका दिया। कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने या तो पक्ष बदल लिया या चुनाव से दूरी बना ली।

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