सूरज सिंह
कई वर्षों तक मुंबई में फरारी काटने के बाद कुख्यात गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुंबई के कांदिवली इलाके से गिरफ्तार कर यूपी ले गई। कुछ ही दिनों में उसे बागपत जिला जेल भेज दिया गया। लेकिन ९ जुलाई २०१८ की सुबह, जेल के भीतर ही उसकी दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप जेल में बंद एक अन्य कुख्यात अपराधी सुनील राठी उर्फ डॉन राठी पर लगा।
सरकारी कहानी में इसे आपसी रंजिश बताया गया, लेकिन सवाल यह है- क्या यह सिर्फ गाली का गुस्सा था या पहले से रची गई साजिश? हत्या के बाद सुनील राठी ने कहा ‘मुन्ना बजरंगी ने मुझे मोटा कहा, इसी गुस्से में मैंने उसे गोली मार दी।’ लेकिन इस बयान ने अपराध से ज्यादा शंकाओं को जन्म दिया।
बुनियादी सवाल
क्या राठी को पहले से पता था कि मुन्ना बजरंगी को उसी जेल में लाया जाएगा? अगर नहीं, तो जेल के भीतर रिवॉल्वर वैâसे पहुंची? अगर हां, तो हथियार पहले से क्यों मौजूद था? क्या एक शब्द (‘मोटा’) किसी डॉन को मौत की स्क्रिप्ट लिखने के लिए काफी है? सुनील राठी उर्फ डॉन राठी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बागपत-मेरठ बेल्ट में हत्या, अपहरण, रंगदारी जैसे अपराधों का गैंगस्टर है। राजनीतिक पकड़ स्थानीय स्तर पर मजबूत मानी जाती है। सुनील राठी पश्चिमी यूपी के उन अपराधियों में रहा है, जिसकी राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच की चर्चा अक्सर होती रही है। उस पर पहले से कई गंभीर मामले दर्ज थे और वह जेल के भीतर भी दबदबे वाला वैâदी माना जाता था। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भी राठी का दबदबा कम नहीं था।
जेल के भीतर हथियार सबसे बड़ा रहस्य
बागपत जेल जैसी हाई-सिक्योरिटी जेल में रिवॉल्वर का पहुंचना, गोली चलना और एक हाई-प्रोफाइल वैâदी की हत्या, यह सब बिना आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं माना जाता। जेल प्रशासन ने बाद में कुछ कर्मचारियों को निलंबित किया, लेकिन बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है। क्या हत्या सिर्फ राठी ने की या रास्ता किसी और ने खोला? राजनीतिक साजिश का एंगल मुन्ना बजरंगी सिर्फ एक अपराधी नहीं था वह मुख्तार अंसारी गिरोह का करीबी शूटर रहा। कई बड़े मामलों का जीवित गवाह था। यूपी की राजनीति और अपराध के गठजोड़ का अहम मोहरा माना जाता था, उसकी मौत से कई मुकदमे कमजोर पड़े। कई नाम हमेशा के लिए दफन हो गए। इसी वजह से इस हत्या को शुरू से ही राजनीतिक षड्यंत्र के तौर पर देखा गया।
‘मोटा कहा’ कहानी या ढाल
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान जानबूझकर हल्का कारण बताया गया। असली मकसद और साजिश इससे कहीं गहरी हो सकती है। राठी का बयान जांच को गलत दिशा में ले जाने का जरिया भी हो सकता है। मुन्ना बजरंगी की हत्या कोई अचानक हुआ अपराध नहीं लगती। जेल ट्रांसफर, हथियार की उपलब्धता और आरोपी का बयान-तीनों एक सोची-समझी पटकथा की ओर इशारा करते हैं। आज भी सवाल कायम है-क्या सुनील राठी सिर्फ हत्यारा था या किसी बड़ी ताकत का मोहरा? सच्चाई जेल की दीवारों में दबी है और शायद कभी बाहर न आए।
