सूफी खान
वेनेजुएला में अमेरिका के हमले और प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को परिवार समेत उठा ले जाने की अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान को लेकर भी कयास लगने लगे हैं। सोशल मीडिया में इस बात को लेकर बात हो रही है कि अगला नंबर ईरान का हो सकता है। ईरान में जिस तरह से सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो रहे हैं और अमेरिका खुली धमकी भी दे रहा है कि अगर ईरान ने अपनी जनता पर सख्ती की तो अमेरिका चुप नहीं रहेगा। इसको लेकर आकलन शुरू हो गया है।
ब्रिटेन के एक अखबार ने तो दावा कर दिया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई और उनके परिवार उनके भरोसेमंद लोगों को ईरान से बाहर निकालने का प्लान बना लिया गया है। अमेरिका के किसी भी हमले की स्थिति में खामेनेई सीरिया के राष्ट्रपति रहे बशर अल असद की तरह ईरान छोड़कर रूस शिफ्ट हो जाएंगे क्योंकि पुतिन और खामेनेई के संबंध बहुत अच्छे हैं। वहीं जानकार कहते हैं कि ईरान की तुलना वेनेजुएला के घटनाक्रम से करना ठीक नहीं होगा। वेनेजुएला में ऊपर से लेकर नीचे तक सारे टॉप अफसर और आर्मी ने जानबूझकर कुछ नहीं किया। तभी तो अमेरिका देश के राष्ट्रपति को अगवा करके ले जाता है और एक गोली भी नहीं चली। जबकि ईरान के मामले में ऐसी कोशिश हुई तो ईरान मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी एयर बेस को तबाह कर देगा। इतना ही नहीं, भयंकर जंग होगी जो पैâसलाकुन या निर्णायक होगी।
रही बात ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई के देश छोड़कर भागने की तो इस पर पश्चिमी मीडिया चाहे जो दावा करे, लेकिन ईरान एक्सपर्ट बताते हैं कि इमाम खामेनेई की उम्र ८६ साल है और उनका पहले से ही ये कहना है कि मुझे कुछ हो भी जाए, लेकिन इमाम हुसैन के रास्ते पर चलते रहना यानी अन्याय के आगे कभी नहीं झुकना।
वेनेजुएला में जब बड़े-बड़े अफसर ही बिक गए तो राष्ट्रपति क्या कर लेते, लेकिन ईरान में ऐसा नहीं है। वहां पासदाराने इस्लाम यानी आईआरजीसी बेहद शक्तिशाली है। इतना ही नहीं, उनके नीचे भी कई ऐसी फोर्सेस हैं, जो वहां इस्लामिक रिवैल्यूएशन के शासन की हिफाजत करती हैं। इतना ही नहीं, ईरान महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों से बात कर रहा है। खुद खामेनेई ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वो प्रदर्शनकारियों को सुनें और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उसका निराकरण करें।
