बुलाकी शर्मा
राजस्थान
टाबर टाबर हुवै। बे चिंत्या सार जाणै ई कोनी। बां सारू सगळी रितुवां इकसार हुवै। हरेक रितु में बे लापरवाह रैवै पण बां री चिंत्या घरआळा करै। सरदी में ऊनी गाभा पैरावै। बांनै घूमण-फिरण सूं बरजै। घर में आराम करावै। बे जाणै वैâ बां री थोड़ी-सीक लापरवाही जुकाम, बुखार, न्युमोनियो आद बीमारियां नै नूंतणो है। भगवान स्री क्रिसण टाबर हा, जणै जसोदा मैया अर भगवान राम रै टाबरपणै में कोसल्या मैया नै भोत चिंत्या रैया करती। टैमोटैम कलैवो करांवता, दोपारै हींडो हिंडावतै बां नै सुवांवता। रात नै टैमसर पोढ़ांवता।
मंदिर-देवरां में ई मौसम रै हिसाब सूं देवी-देवतावां नै वस्त्र पैराईजै। सियाळै में सरदी रै बचाव सारू हीटर लगाइजै अर ऊंनाळै (गरमी) में अेसी वैâ कूलर। बिंदराबन में भगवान बांके बिहारी बाल गोपाल सरूप में बिराजमान है अर बां री मूरत नै सजीव मानता थकां पूजा-अर्चना करीजै। पुजारी जी भोरानभोर ठाकुरजी नै जगावै, सिंणगार करै, भोग लगावै फेर भगतां रै दरसण सारू पट खोलै। दोपारै ठाकुर जी आराम फरमावै। बाल गोपाल रै आराम रो पूरो ध्यान राखीजै। टाबर है। सरदी अर गरमी सूं बचाव जरूरी है।
पण भगत ई जबरा है। खासकर धन्नासेठ अर खास पद-प्रतिष्ठा रै गुमान में अकड़ीज्यो़ड्या भगत। बे बांके बिहारी लाल रै आराम में खलल घालण में ई संको कोनी करै। मोटी भेंट देय’र बे खास पूजा रै नांव पोढ़ रैया ठाकुरजी री नींद खराब करै। इसा वीआईपी भगत सोचै वैâ बांके बिहारी लाल बां री मनोकामना पूरण करसी, ओ बां रो दंभ अर दिखाऊ भगती है। टाबर नै काची नींद सूं जगायां बो राजी हुयसी वैâ बेराजी! इत्ती ई समझ कोनी आं धन-पशुवां नै?
बांके बिहारी लाल रै आराम री चिंत्या नीं कर’र वीवीआईपी भगतां रो ‘कीमती टैम’ बचावण री चिंत्या करतां बां रै दरसण रो टैम दिनूंगै अर सिंझ्या रो बधा दियो, इण सूं ठाकुर जी रै आराम में ढाई घंटा री कटौती हुयगी। दरसण देंवता-देंवता ठाकुर जी थाक जावै, जिणसूं पीढ़ियां सूं बां री पूजा-अर्चना कर रैया गोस्वामी सेवादार पुजारियां नै दुखी हुय’र सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगावणी पड़ी। चीफ जस्टिस ई अफसोस करियो वैâ पुराणी व्यवस्था में करियोड़ो ओ बदळाव भगवान रो शोषण करण रै समान है अर बां मिंदर मैनेजमेंट, मथुरा जिलाधिकारी अर यूपी सरकार नै नोटिस दिया है।
बांके बिहारी लाल रै आराम रै टैम रो पैâसलो अबै सुप्रीम कोर्ट करसी पण इण कळजुग में पईसै नै भगवान सूं ई सुपर मानणिया आपरै भगतां रो गरूर देख’र बांके बिहारी लाल मोहिनी मुळक बिखेर रैया है।
