मुख्यपृष्ठस्तंभवायरल न्यूज : मोदी ने हर सेक्टर को हिला डाला!

वायरल न्यूज : मोदी ने हर सेक्टर को हिला डाला!

मनमोहन सिंह
हमारे एक मित्र नए साल पर बधाई देते ही हम पर बिफर पड़े। ‘नए साल की शुभकामनाओं का क्या औचित्य है? पिछले ११ साल की तरह यह साल भी चला जाएगा…’
‘लेकिन शुभकामनाएं स्वीकार करने में आपका जाता क्या है?’ हमने सवाल किया!
‘क्या जाता है… आप जैसे लोगों को तो देश की कुछ पड़ी भी नहीं है…’ कहते हुए उन्होंने हम पर लानत भेजी और शुरू हो गए।
‘गंगा साफ नहीं हुई। १०० स्मार्ट सिटीज नहीं बनीं। किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई। काला धन वापस नहीं आया। महंगाई कंट्रोल नहीं हुई। रुपया निरंतर नीचे गिरते हुए, अब डॉलर के मुकाबले ९० से नीचे चला गया। पेट्रोल १०० के ऊपर पहुंच गया। एजुकेशन सिस्टम की ऐसी-तैसी हो गई है, हर साल पेपर लीक होने के रिकॉर्ड बन रहे हैं।’ एक साथ में इतना कह गए। ‘इलेक्टोरल बांड के जरिए भ्रष्टाचार लीगलाइज कर दिया गया है। हर साल दो करोड़ नौकरियां नहीं मिल रहीं। बेरोजगार सड़क पर डंडे खा रहा है! महिला सुरक्षा और हेल्थकेयर की हालत सबको पता ही है। गौहत्या बंद नहीं हुई। मेक इन इंडिया फेल हो गया। मैन्युपैâक्चरिंग सेक्टर को २५ प्रतिशत ले जाने के बजाय ग्रोथ और घट गई। प्रति व्यक्ति आय में आनुपातिक वृद्धि नहीं हुई। आर्थिक असमानता बढ़ गयी है। नोटबंदी फेल हो गई थी। आतंकवाद कम नहीं हुआ। घुसपैठियों को तड़ीपार नहीं किया गया। सीमाएं सुरक्षित नहीं हुईं। विदेश नीति आईसीयू में है। सिंदूर सीजफायर पर हम अमेरिका के हाथों राष्ट्रीय संप्रभुता का हनन करा चुके हैं।’
उन्होंने एक लंबी सांस ली और हमारी तरफ देखा। फिर बोले, ‘हमने तो तुम्हारे जैसे मित्र बना रखे हैं, पाल रखे हैं लेकिन… दुनिया में भारत के ३ मित्र देश भी आज नहीं हैं। हर पड़ोसी हमारा दुश्मन बना हुआ है। मानव सूचकांक में भारत १३०वें नंबर पर है। भारत के पासपोर्ट की रैंकिंग ८५वें पायदान पर है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में हम १३६वें नंबर पर हैं। शिक्षा, हेल्थ, रक्षा- कोई भी ऐसा सेक्टर नहीं होगा, जिसका बजट रेशियो टू जीडीपी पिछले ११ सालों में कम न हुआ हो।’
हमारे एक और धुरंधर मित्र साथ में खड़े थे अब उनसे रहा नहीं गया वे बोले, ‘मोदी सरकार ने देश को उन्नति की राह पर ला खड़ा किया है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सरकार ने कई क्षेत्रों में काम किया है, जैसे कि इंप्रâास्ट्रक्चर विकास, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान और आयुष्मान भारत योजना आदि… आज आपकी जो लाइफस्टाइल है यह होने की वजह से है एहसान फरामोश कहीं के…’
तीसरे मित्र बोल उठे, ‘आप तो सरकार के भी बाप बन गए… सरकार की आलोचना करनेवालों को अक्सर ‘देशद्रोही’ का तमगा दिया जाता है, जो कि एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। आपने एहसान फरामोश बना दिया…!’ आप क्या सोचते हैं? क्या सरकार को अपनी नीतियों और कार्यों की आलोचना को स्वीकार करना चाहिए?

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